Pakistan Honor Killing
Pakistan Honor Killing: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित सरगोधा जिले से एक ऐसी दरिंदगी की खबर सामने आई है, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। सोमवार की सुबह एक सिरफिरे शख्स ने ‘इज्जत’ की झूठी खातिर अपने ही परिवार के छह सदस्यों को मौत के घाट उतार दिया। आरोपी ने अपनी पत्नी और पांच मासूम बच्चों पर कुल्हाड़ी से हमला कर उनकी बेरहमी से हत्या कर दी। इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर पाकिस्तान में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। श्रीलंका के ‘डेली मिरर’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस सामूहिक हत्याकांड ने देश की चरमराती सामाजिक व्यवस्था और कमजोर कानून-व्यवस्था को बेनकाब कर दिया है।
पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के मुताबिक, आरोपी को अपनी पत्नी और 16 साल की किशोर बेटी के चरित्र पर संदेह था। उसे शक था कि उनके किसी गैर मर्द के साथ संबंध हैं। इसी वहम और ‘झूठी आन’ के चक्कर में उसने तड़के सोते हुए परिवार पर कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ वार किए। मृतकों में उसकी पत्नी के अलावा, 16 साल की बेटी, 5 से 13 साल के तीन बेटे और एक कुछ महीनों का मासूम बच्चा भी शामिल है। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ने खुदकुशी की कोशिश की, लेकिन वह बच गया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है, पर इस जघन्य अपराध ने पूरे सरगोधा इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
पाकिस्तान के मानवाधिकार मंत्री आजम नजीर तारार द्वारा पेश किए गए सरकारी आंकड़े इस संकट की गहराई को बयां करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2021 से 2024 के बीच पाकिस्तान में 7,500 से अधिक महिलाओं की हत्या की गई, जिनमें से 1,553 मामले सीधे तौर पर ‘ऑनर किलिंग’ यानी इज्जत के नाम पर की गई हत्या के थे। अंतरराष्ट्रीय संस्था ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ की रिपोर्ट और भी डरावनी तस्वीर पेश करती है, जिसके अनुसार पाकिस्तान में प्रति वर्ष लगभग 1,000 महिलाओं को उनके ही रिश्तेदारों द्वारा ‘इज्जत’ के नाम पर मार दिया जाता है।
करीब एक दशक पहले सोशल मीडिया स्टार कंदील बलोच की उसके भाई द्वारा की गई हत्या ने पूरी दुनिया का ध्यान पाकिस्तान की इस कुरीति की ओर खींचा था। उस घटना के भारी दबाव के बाद 2016 में पाकिस्तान दंड संहिता (PPC) में कड़े संशोधन किए गए थे ताकि दोषियों को परिवार की माफी के बावजूद सजा मिल सके। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ये कानूनी बदलाव जमीनी स्तर पर निष्प्रभावी साबित हुए हैं। अपराधियों में कानून का कोई खौफ नहीं है क्योंकि पितृसत्तात्मक सामाजिक ढांचा और न्यायिक प्रक्रिया में देरी अक्सर हत्यारों को बचा लेती है।
सरगोधा की यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि पाकिस्तान के समाज में घर कर चुकी एक गहरी बीमारी का लक्षण है। जहाँ एक तरफ दुनिया आधुनिकता की ओर बढ़ रही है, वहीं पाकिस्तान के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी महिलाओं के जीवन का फैसला ‘झूठी इज्जत’ के पैमानों पर किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और त्वरित न्याय की व्यवस्था नहीं होगी, तब तक मासूम बच्चों और महिलाओं की बलि इसी तरह चढ़ती रहेगी।
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