Pakistan Human Rights Report
Pakistan Human Rights Report : पाकिस्तान के सबसे बड़े प्रांत पंजाब में कानून व्यवस्था के नाम पर होने वाली न्यायेतर हत्याओं (Extrajudicial Killings) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में पुलिस प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे प्रहार किए हैं। आयोग का आरोप है कि ‘क्राइम कंट्रोल डिपार्टमेंट’ (CCD) अपराधियों को सजा दिलाने के बजाय ‘शॉर्टकट’ अपना रहा है, जो लोकतंत्र और कानून के शासन के लिए एक बड़ा खतरा है। इस रिपोर्ट ने पाकिस्तान के भीतर राज्य प्रायोजित हिंसा की बहस को दोबारा जन्म दे दिया है।
आयोग ने शहबाज शरीफ सरकार और पंजाब के प्रांतीय प्रशासन से मांग की है कि संदिग्ध पुलिस मुठभेड़ों के इन अभियानों को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए। HRCP का तर्क है कि सार्वजनिक सुरक्षा और अपराध नियंत्रण केवल न्यायिक प्रक्रियाओं और कानूनी जवाबदेही के माध्यम से ही संभव है। आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस की इन हिंसक कार्रवाइयों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि को कभी न भरने वाला नुकसान हो सकता है, जिससे वैश्विक मंचों पर देश अलग-थलग पड़ जाएगा।
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़े पुलिस की कहानी पर बड़े सवाल खड़े करते हैं। वर्ष 2025 के शुरुआती आठ महीनों के भीतर पंजाब में कुल 670 मुठभेड़ें दर्ज की गईं। इन कथित सैन्य ऑपरेशनों में 924 संदिग्धों को मौत के घाट उतार दिया गया। हैरानी की बात यह है कि जहाँ सैकड़ों संदिग्ध मारे गए, वहीं पुलिस बल की ओर से केवल दो कर्मियों की जान गई। मौत के आंकड़ों का यह भारी असंतुलन साफ संकेत देता है कि ये आमने-सामने की लड़ाई नहीं, बल्कि एकतरफा और सुनियोजित हत्याएं हो सकती हैं।
मानवाधिकार आयोग ने क्राइम कंट्रोल डिपार्टमेंट (CCD) की एफआईआर (FIR) और प्रेस विज्ञप्तियों का विश्लेषण किया है। आयोग ने पाया कि लगभग हर मामले में पुलिस की कहानी एक जैसी होती है—”संदिग्धों ने पुलिस टीम पर हमला किया, जिसके बाद आत्मरक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई में वे मारे गए।” आयोग ने इसे एक ‘संस्थागत प्रथा’ बताया है, जहाँ कानूनी औपचारिकताएं निभाने के लिए पूर्व-निर्धारित स्क्रिप्ट का पालन किया जा रहा है, जो निष्पक्ष जांच के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है।
रिपोर्ट में उन परिवारों का दर्द भी साझा किया गया है जिन्होंने इन मुठभेड़ों में अपनों को खोया है। आरोप है कि पुलिस अधिकारी पीड़ित परिवारों पर शवों का तुरंत अंतिम संस्कार करने के लिए भारी दबाव डालते हैं ताकि कोई पोस्टमार्टम या स्वतंत्र जांच न हो सके। परिजनों को डराया-धमकाया जाता है कि यदि उन्होंने कानूनी रास्ता अपनाया या मानवाधिकार संगठनों से संपर्क किया, तो उनके परिवार के अन्य सदस्यों को भी गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस डर के कारण कई मामले कभी अदालतों तक नहीं पहुँच पाते।
HRCP के अनुसार, पाकिस्तान की यह कार्यप्रणाली संयुक्त राष्ट्र (UN) के ‘बल और आग्नेयास्त्रों के उपयोग के बुनियादी सिद्धांतों’ का सीधा उल्लंघन है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के मुताबिक, घातक बल का प्रयोग केवल तभी किया जाना चाहिए जब वह अत्यंत अनिवार्य हो। पाकिस्तान के नागरिक समाज और न्यायपालिका ने भी इन घटनाओं पर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब राज्य खुद कानून हाथ में लेने लगता है, तो न्याय प्रणाली पर जनता का विश्वास पूरी तरह समाप्त हो जाता है।
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