Pakistan IMF Loan
Pakistan IMF Loan : आर्थिक बदहाली और भारी कर्ज के बोझ तले दबे पाकिस्तान के लिए एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ‘संकटमोचक’ बनकर सामने आया है। अपनी चरमराती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए हाथ-पैर मार रहे इस्लामाबाद ने आईएमएफ के साथ एक प्रारंभिक समझौता किया है, जिसके तहत उसे 1.2 अरब डॉलर की नई किश्त हासिल होगी। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार कर्ज मांगकर गुजारा करने की पाकिस्तान की यह नीति लंबे समय तक कारगर नहीं होगी और यह उसे और भी गहरे वित्तीय दलदल में धकेल सकती है।
पाकिस्तान और आईएमएफ के बीच इस राशि को लेकर बातचीत का दौर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। आईएमएफ के प्रतिनिधिमंडल ने 25 फरवरी से 2 मार्च 2026 के बीच कराची और इस्लामाबाद में पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ आमने-सामने की चर्चा की थी। उस समय कड़े सुधारों की शर्तों के कारण कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका था। इसके बाद कूटनीतिक और तकनीकी स्तर पर बातचीत ऑनलाइन जारी रही। शनिवार को आईएमएफ ने पुष्टि की कि विस्तारित कोष सुविधा (EFF) की तीसरी समीक्षा और ‘रेजिलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी’ (RSF) की दूसरी समीक्षा सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है, जिससे कर्ज का रास्ता साफ हो गया है।
इस समझौते के तहत पाकिस्तान को मिलने वाली कुल राशि को दो हिस्सों में बांटा गया है। आईएमएफ की मिशन प्रमुख इवा पेट्रोवा ने जानकारी दी कि कार्यकारी बोर्ड की अंतिम मंजूरी के बाद पाकिस्तान को ईएफएफ (EFF) के तहत लगभग 1 अरब डॉलर दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए आरएसएफ (RSF) सुविधा के अंतर्गत करीब 21 करोड़ डॉलर (210 मिलियन डॉलर) की राशि जारी की जाएगी। यह फंड पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को कुछ समय के लिए स्थिरता प्रदान करने में मददगार साबित होगा।
गौरतलब है कि पाकिस्तान वर्ष 2024 में आईएमएफ के 7 अरब डॉलर के विस्तारित कोष सुविधा कार्यक्रम में शामिल हुआ था। इस 37 महीने लंबे कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, निवेशकों का भरोसा बहाल करना और राजकोषीय घाटे को कम करना है। आईएमएफ ने पाकिस्तान पर ऊर्जा क्षेत्र में सुधार करने और अक्षमताओं को दूर करने के लिए कड़ा दबाव बनाया है। इसी कड़ी में पिछले वर्ष भी पाकिस्तान को हरित वित्तपोषण और जल दक्षता बढ़ाने के नाम पर 1.4 अरब डॉलर की सहायता मिली थी।
पाकिस्तान की वर्तमान स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक इसे ‘भीख मांगने की संस्कृति’ करार दे रहे हैं। कभी सऊदी अरब, कभी यूएई, तो कभी चीन और आईएमएफ के सामने कटोरा फैलाने से पाकिस्तान की साख वैश्विक मंच पर लगातार गिर रही है। बुनियादी ढांचों के विकास और औद्योगिक उत्पादन को बढ़ाने के बजाय, देश केवल पुराने कर्जों का ब्याज चुकाने के लिए नया कर्ज ले रहा है। सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक पाकिस्तान बाहरी मदद के भरोसे अपनी संप्रभुता और अर्थव्यवस्था को बचाए रख पाएगा।
आईएमएफ से मिलने वाला यह पैसा मुफ्त नहीं है। इसके बदले में पाकिस्तान सरकार को करों में भारी बढ़ोतरी, बिजली और गैस की कीमतों में इजाफा और सब्सिडी में कटौती जैसे कड़े कदम उठाने होंगे। इसका सीधा असर वहां की आम जनता पर पड़ेगा, जो पहले से ही रिकॉर्ड तोड़ महंगाई से त्रस्त है। शहबाज शरीफ सरकार के लिए चुनौती यह है कि वे आईएमएफ की शर्तों को पूरा करें या जनता के आक्रोश को शांत रखें। फिलहाल, 1.2 अरब डॉलर की यह ‘संजीवनी’ पाकिस्तान को कुछ और महीनों की मोहलत जरूर दे देगी, लेकिन स्थाई समाधान अभी भी कोसों दूर है।
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