अंतरराष्ट्रीय

Pakistan Protest: पाकिस्तान के मुरीदके में बड़ा नरसंहार, टीएलपी मार्च पर फायरिंग में 280 की मौत, 1900 घायल

Pakistan Protest: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के शेखपुरा जिले में स्थित मुरीदके शहर सोमवार (13 अक्टूबर, 2025) को एक भीषण नरसंहार का गवाह बना। कट्टरपंथी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) के इस्लामाबाद कूच को रोकने के लिए पाकिस्तानी रेंजर्स और पुलिस ने तड़के करीब 4 बजे से लेकर सुबह 9 बजे तक लगातार गोलीबारी की। इस अमानवीय कार्रवाई में अब तक 280 से अधिक लोगों की मौत और 1900 से ज्यादा घायल होने की पुष्टि हुई है।

TLP का ‘लब्बैक या अक्सा मार्च’

गाज़ा संघर्ष और अमेरिका-इजरायल की भूमिका के विरोध में टीएलपी ने ‘लब्बैक या अक्सा मार्च’ की शुरुआत लाहौर से की थी। इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास के सामने प्रदर्शन करना इस मार्च का उद्देश्य था। हालांकि, शुक्रवार को मार्च शुरू होते ही लाहौर में पुलिस और रेंजर्स की कार्रवाई में 15 लोग मारे गए थे।

मुरीदके में बना नरसंहार का मैदान

शनिवार रात तक यह मार्च मुरीदके पहुंचा, जहां पाकिस्तानी सरकार और टीएलपी के बीच बातचीत हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। रविवार रात 11 बजे टीएलपी प्रमुख मौलाना साद हुसैन रिज़वी ने सोमवार सुबह इस्लामाबाद कूच का ऐलान कर दिया। इसके बाद सोमवार सुबह सुरक्षा बलों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर AK-47 और अन्य स्वचालित हथियारों से अंधाधुंध फायरिंग की।

ABP न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, गोलीबारी के पहले स्मोक ग्रेनेड और फिर सीधी फायरिंग की गई। कई वीडियो में मंच पर मौलाना साद रिज़वी को गोली लगते हुए और गिरते हुए भी देखा गया। पुलिस और रेंजर्स ने प्रदर्शन स्थल को आग के हवाले कर दिया, जिससे स्थिति और भयावह हो गई।

सरकार की भूमिका पर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम से कुछ घंटे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और गृहमंत्री मोहसिन नकवी के बीच आपातकालीन बैठक हुई थी। सूत्रों के अनुसार, इसी बैठक में इस नरसंहार की योजना बनाई गई थी। जानकारों का कहना है कि सरकार ने इस मार्च को बलपूर्वक रोकने का फैसला पहले ही कर लिया था।

एक महीने में तीसरी बार गोलीबारी

यह घटना पिछले एक महीने में तीसरी बार है जब पाकिस्तान में निहत्थे लोगों पर गोलीबारी हुई है। इससे पहले 29 सितंबर और 1 अक्टूबर को पीओके में विरोध प्रदर्शन के दौरान 19 लोगों की मौत हुई थी। 11 अक्टूबर को लाहौर में 15 और अब 13 अक्टूबर को मुरीदके में 280 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं।

मुरीदके नरसंहार पाकिस्तान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रदर्शन के अधिकार और मानवाधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस पर अब तक कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस घटना ने पाकिस्तान में राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता को और गहरा कर दिया है।

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