Pakistani Drones Rajouri
Pakistani Drones Rajouri: जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती जिलों में पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। ताजा घटनाक्रम में, जम्मू संभाग के राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) के पास एक बार फिर पाकिस्तानी ड्रोन्स की सक्रियता देखी गई है। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, एक के बाद एक कुल 5 पाकिस्तानी ड्रोन भारतीय हवाई क्षेत्र के करीब देखे गए। सीमा पर तैनात सतर्क जवानों ने जैसे ही इन संदिग्ध ड्रोन्स की आवाजाही देखी, पूरे इलाके में अलर्ट जारी कर दिया गया। यह घटना बताती है कि पड़ोसी देश तकनीक का सहारा लेकर भारतीय सीमा की सुरक्षा में सेंध लगाने की लगातार कोशिश कर रहा है।
राजौरी सेक्टर में ड्रोन्स के नजर आते ही भारतीय सेना और सुरक्षाबलों ने बिना समय गंवाए जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। जवानों ने ड्रोन्स को निशाना बनाते हुए भारी काउंटर फायरिंग की। गोलाबारी की आवाज से पूरा इलाका गूंज उठा। सुरक्षाबलों की इस आक्रामक प्रतिक्रिया के बाद ड्रोन वापस पाकिस्तानी सीमा की ओर मुड़ गए या ओझल हो गए। सैन्य अधिकारियों का कहना है कि वे किसी भी तरह की घुसपैठ को बर्दाश्त नहीं करेंगे। फायरिंग का मुख्य उद्देश्य इन ड्रोन्स को भारतीय क्षेत्र के भीतर किसी भी तरह की सामग्री गिराने या जासूसी करने से रोकना था।
पाकिस्तान द्वारा बार-बार ड्रोन्स का इस्तेमाल करना एक गंभीर सुरक्षा चुनौती बन गया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन ड्रोन्स का उपयोग दो मुख्य उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। पहला, भारतीय सेना की चौकियों और उनकी स्थिति की जासूसी करना। दूसरा, नियंत्रण रेखा के इस पार सक्रिय आतंकियों के लिए हथियार, ड्रग्स या विस्फोटक (IED) गिराना। राजौरी और पुंछ जैसे इलाकों में घने जंगल और पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण पाकिस्तान अक्सर इस तरह के ‘ड्रोन मॉड्यूल’ का सहारा लेता है ताकि वह बिना आमने-सामने की जंग के भारत में अस्थिरता पैदा कर सके।
ड्रोन देखे जाने और फायरिंग की घटना के तुरंत बाद, राजौरी के प्रभावित इलाकों में सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा एक संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया गया है। सुरक्षाबलों को अंदेशा है कि ड्रोन्स के जरिए सीमा पार से कुछ आपत्तिजनक सामग्री गिराई गई हो सकती है। जवानों द्वारा जंगलों, गुफाओं और रिहायशी इलाकों के पास के क्षेत्रों की बारीकी से जांच की जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों को भी सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति के दिखने पर तुरंत सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सीमा पर बढ़ते ड्रोन संकट को देखते हुए भारतीय सेना अब आधुनिक ‘एंटी-ड्रोन सिस्टम’ की तैनाती पर जोर दे रही है। राजौरी की इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि पारंपरिक सुरक्षा घेरे के साथ-साथ अब इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस को और मजबूत करना अनिवार्य है। सेना ने LoC पर जैमर्स और हाई-टेक सेंसर्स की संख्या बढ़ा दी है ताकि ड्रोन्स के सिग्नल को जाम किया जा सके। सरकार और रक्षा मंत्रालय इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उठाने की तैयारी में हैं कि किस तरह पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के नियमों का उल्लंघन कर रहा है।
वर्तमान में राजौरी और आसपास के क्षेत्रों में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। हालांकि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन सेना ने अपनी ‘हाई अलर्ट’ की स्थिति बरकरार रखी है। बर्फबारी की शुरुआत से पहले पाकिस्तान अक्सर घुसपैठ की कोशिशें तेज कर देता है, जिसे देखते हुए नाइट विजन गैजेट्स और रडार के जरिए 24 घंटे निगरानी की जा रही है। भारतीय जवानों का मनोबल ऊंचा है और वे किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार हैं। आने वाले दिनों में सीमा पर चौकसी को और अधिक कड़ा किए जाने की संभावना है।
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