Pankaj Beck Custodial Death : 7 साल बाद फिर खुलेगा पंकज बेक कस्टोडियल डेथ केस, कोर्ट ने खात्मा आदेश रद्द कर दिए नई जांच के निर्देश

Pankaj Beck Custodial Death : अंबिकापुर के बहुचर्चित पंकज बेक कस्टोडियल डेथ प्रकरण की नए सिरे से जांच होगी। सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश महेश कुमार राज की अदालत ने प्रकरण में प्रस्तुत पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार कर लिया है। लगभग सात वर्ष पूर्व हुए इस प्रकरण में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत के खात्मा, खारिजी आदेश को अदालत ने निरस्त कर दिया है।

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अदालत ने कहा है कि प्रकरण में प्रस्तुत साक्ष्य व दस्तावेजों के अवलोकन से यह दर्शित होता है कि पंकज बेक की मृत्यु पुलिस कस्टडी में दम घुटने से हुई है, जिस पर गंभीरता पूर्वक जांच किया जाना उचित प्रतीत हो रहा है। अतः मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष खात्मा हेतु प्रस्तुत आवेदन एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का खात्मा आदेश दिनांक 27 जुलाई 2023 को विधि विरुद्ध होने के कारण निरस्त किया जाता है, तथा पुनरीक्षणकर्ता की ओर से प्रस्तुत पुनरीक्षण याचिका स्वीकार किया जाता है।

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सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश महेश कुमार राज की अदालत ने पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा को निर्देशित किया है कि उक्त प्रकरण की जांच पुलिस अधीक्षक की देखरेख में टीम गठित कर कराई जाए। पुनरीक्षण आवेदन के साथ प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार प्रकरण की विवेचना कराएं। अदालत ने कहा है कि अगर विवेचना कराने में सक्षम नहीं हैं तो उक्त प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंप दी जाए।

मृतक पंकज बेक की पत्नी रानू बेक की ओर से अंबिकापुर के अधिवक्ता राजवर्धन सिंह ने पुनरीक्षण याचिका अदालत में प्रस्तुत की थी। अधिवक्ता ने प्रकरण से जुड़े तमाम साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की कार्रवाई से संबंधित जानकारी अदालत के समक्ष प्रस्तुत की थी। घटना पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल में हुई थी। पांच पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों पर परिजन ने हत्या का आरोप लगाकर शव को फांसी के फंदे पर लटका देने का आरोप लगाया था।

सभी पुलिस अधिकारी- कर्मचारियों को उस दौरान निलंबित कर दिया गया था। इनके विरुद्ध आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने का अपराध दर्ज किया गया था। सीजेएम न्यायालय से प्रकरण खारिज होने के बाद सभी पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों को बहाल कर दिया गया था। आज सभी प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पदस्थ हैं।

यह था प्रकरण

अंबिकापुर के तनवीर सिंह नामक व्यक्ति ने कथित रूप से 27 जुलाई 2019 को थाने में शिकायत की थी कि उनके यहां सीसीटीवी लगाने आए पंकज बेक और इमरान खान द्वारा अलमारी से एक लाख रुपये चोरी कर लिए गए हैं। इसी शिकायत की जांच के नाम पर पुलिस दोनों को लगातार पूछताछ के लिए थाने और साइबर सेल में बुला रही थी। इस दौरान दोनों को अमानवीय रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगा था। पुलिस पर यह भी आरोप था कि सिर्फ मौखिक शिकायत पर पुलिस इन दोनों को बुलाकर प्रताड़ित कर रही थी। पंकज की मौत के बाद पुरानी तिथि पर प्राथमिकी करने का आरोप लगा था।

पुलिस ने बताई थी यह कहानी

22 जुलाई 2019 की सुबह पंकज बेक का शव डीसी रोड स्थित परमार हॉस्पिटल परिसर में संदिग्ध परिस्थिति में फांसी पर लटकी मिली थी। शरीर पर चोट के निशान भी थे। पुलिस ने उस दौरान यह कहानी बताई थी कि साइबर सेल में पूछताछ के दौरान 21 जुलाई 2019 की रात पंकज बेक पेशाब व उल्टी का बहाना कर दीवार फांदकर भाग गया था। वह सीधे परमार हासिप्टल परिसर पहुंच कर फांसी लगा ली थी हालांकि परिस्थितियों को देखकर पहले दिन से ही स्वजन ने पुलिस की कहानी पर संदेह जता पंकज बेक की हत्या कर शव को फांसी के फंदे पर लटकाने का आरोप लगाया था।

इन पुलिसकर्मियों पर दर्ज हुई थी प्राथमिकी

पंकज बेक कस्टोडियल डेथ को लेकर राजनीति भी गरमाई थी। उस दौरान भाजपा विपक्ष में थी। भाजपा ने जांच कमेटी का भी गठन किया था। लगातार दबाब के कारण तत्कालीन थाना प्रभारी विनीत दुबे, उप निरीक्षक प्रियेश जान, मनीष यादव, आरक्षक दीनदयाल सिंह, लक्ष्मण सिंह के विरुद्ध आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने की धारा 306, 34 के तहत प्राथमिकी की गई थी। अदालत में चालान भी प्रस्तुत किया गया था। सीजेएम न्यायालय में सुनवाई के बाद 27 जुलाई 2023 को प्रकरण का खात्मा कर दिया गया था और सभी पुलिसकर्मी दोषमुक्त कर दिए गए थे।

कौन था पंकज बेक

पंकज बेक मूलतः सूरजपुर जिले के भटगांव थाने के ग्राम अधिनापुर का रहने वाला था। अंबिकापुर में रहकर वह काम किया करता था। घरों, दुकानों में सीसी कैमरा लगाने का काम करने वाले पंकज और उसके सहकर्मी पर चोरी के आरोप लगने के बाद यह सारा घटनाक्रम हुआ था। पंकज की संदिग्ध मौत के बाद उसकी पत्नी रानू बेक लगातार न्याय के लिए संघर्ष करती रही। इस दौरान कई बाधाएं भी आई लेकिन उसने हिम्मत से काम लिया।

अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों ने एक बार फिर इस प्रकरण की फाइल खोल दी है। तमाम तथ्यों के आधार पर अदालत ने एसपी की देखरेख में प्रकरण की जांच कराने निर्देशित किया है। ऐसा संभव नहीं होने पर प्रकरण सीबीआई को सौपने के आदेश दिए गए हैं।

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