Pappu Yadav Arrest
Pappu Yadav Arrest: बिहार की सियासत में शुक्रवार की देर रात उस वक्त हड़कंप मच गया, जब पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को पटना पुलिस ने उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई 31 साल पुराने एक आपराधिक मामले में कोर्ट द्वारा जारी वारंट के आधार पर की गई है। गिरफ्तारी के दौरान पटना की सड़कों पर हाई-वोल्टेज ड्रामा और समर्थकों का भारी हंगामा देखने को मिला।
सांसद पप्पू यादव शुक्रवार रात ही दिल्ली में संसद सत्र में हिस्सा लेकर पटना लौटे थे। उनके घर पहुँचने के कुछ ही देर बाद भारी संख्या में पुलिस बल उनके मन्दिरी स्थित आवास पर पहुँच गया। पुलिस को देखते ही सांसद और उनके समर्थकों ने विरोध शुरू कर दिया। पप्पू यादव ने स्पष्ट कहा कि वह रात के समय पुलिस के साथ नहीं जाएंगे और शनिवार सुबह खुद अदालत में पेश होंगे। उन्होंने पुलिस से ‘हाउस अरेस्ट’ करने की भी अपील की, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उनकी एक न सुनी और उन्हें हिरासत में लेने पर अड़े रहे।
जैसे ही पप्पू यादव की गिरफ्तारी की खबर फैली, उनके सैकड़ों समर्थक आवास के बाहर जमा हो गए। समर्थकों ने पुलिस के वाहनों को घेर लिया और सरकार विरोधी नारेबाजी की। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस को भीड़ हटाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। कुछ समर्थक पुलिस की गाड़ियों पर चढ़ गए और कार्रवाई को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया। अंततः, पुलिस पप्पू यादव को अपने साथ ले जाने में सफल रही और प्रोटोकॉल के तहत उन्हें मेडिकल जांच के लिए आईजीआईएमएस (IGIMS) अस्पताल ले जाया गया।
यह पूरी कानूनी कार्रवाई 31 साल पुराने एक धोखाधड़ी के मामले से जुड़ी है। साल 1995 में पटना के गर्दनीबाग थाने में विनोद बिहारी लाल नामक व्यक्ति ने पप्पू यादव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उनके मकान को रिहायशी उद्देश्य के लिए किराए पर लिया गया था, लेकिन धोखे से वहां सांसद का कार्यालय खोल दिया गया। मकान मालिक को इस बात की जानकारी नहीं दी गई थी कि संपत्ति का व्यावसायिक या राजनीतिक उपयोग होगा। इसी मामले में जमानत खत्म होने और कोर्ट में पेश न होने के कारण उनके खिलाफ वारंट जारी हुआ था।
अपनी गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए पप्पू यादव ने इसे राज्य सरकार की साजिश करार दिया। उन्होंने कहा, “मैं कानून का सम्मान करता हूँ और अदालत में पेश होने वाला था, लेकिन सादे कपड़ों में आए पुलिसकर्मियों ने मेरे साथ दुर्व्यवहार किया।” उन्होंने दावा किया कि वह हाल ही में एक नीट (NEET) अभ्यर्थी की संदिग्ध मौत के मामले में सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे और सरकार की विफलताओं को उजागर कर रहे थे, इसीलिए उन्हें चुप कराने के लिए यह पुरानी फाइल खोली गई है।
पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कार्तिकेय शर्मा ने इस मामले पर स्पष्टता देते हुए कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी है। सांसद/विधायक (MP/MLA) कोर्ट ने 1995 के मामले में पप्पू यादव के बार-बार गैर-हाजिर रहने पर उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। पुलिस का काम केवल अदालत के आदेश का पालन करना और आरोपी को न्यायिक हिरासत में पेश करना है। पुलिस ने किसी भी तरह के दुर्व्यवहार के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
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