राष्ट्रीय

Parliament Session 2026: संसद में घमासान, गौरव गोगोई का ‘माइक’ वाला प्रहार, किरेन रिजिजू ने दिया तीखा पलटवार

Parliament Session 2026: कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ नेता गौरव गोगोई ने संसद की वर्तमान कार्यप्रणाली को लेकर केंद्र सरकार और लोकसभा अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गोगोई ने कहा कि सदन की गरिमा तब दांव पर लग जाती है जब ‘चेयर’ की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगें। उन्होंने पूर्व थल सेनाध्यक्ष एम.एम. नरवणे की किताब पर चर्चा का हवाला देते हुए कहा कि उस दिन विपक्ष को उम्मीद थी कि उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलेगा, लेकिन इसके विपरीत विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की गई। गोगोई के अनुसार, भारतीय लोकतंत्र की नींव संवाद पर टिकी है, लेकिन वर्तमान में विपक्ष के नेताओं को अपनी बात पूरी करने से पहले ही रोक दिया जाता है।

नेता प्रतिपक्ष की अनदेखी: राहुल गांधी और शशि थरूर के माइक पर विवाद

गोगोई ने आरोप लगाया कि सदन में नेता प्रतिपक्ष (LoP) राहुल गांधी को बार-बार टोका जा रहा है। उन्होंने बताया कि जब राहुल गांधी अंतरराष्ट्रीय मामलों और भ्रष्टाचार के आरोपों पर तथ्यों के साथ बात कर रहे थे, तब स्पीकर ने उन्हें बार-बार ‘वेरिफिकेशन’ (पुष्टि) के लिए बाध्य किया। गोगोई ने इसे संसदीय परंपराओं का उल्लंघन बताते हुए कहा कि जब राहुल गांधी अपनी बात रख रहे थे, उसी समय उनके खड़े रहते हुए किसी अन्य सदस्य को बोलने की अनुमति दे दी गई। इतना ही नहीं, उन्होंने शशि थरूर का उदाहरण देते हुए कहा कि बोलने के दौरान उनका माइक बंद कर दिया गया, जो यह दर्शाता है कि सत्ता पक्ष विपक्ष की उपस्थिति से असहज है।

इतिहास और आदर्शों का हवाला: नेहरू और सुषमा स्वराज की याद

सदन की गरिमा को समझाते हुए गौरव गोगोई ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के कथनों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नेहरू जी ने स्पीकर को देश की स्वतंत्रता का प्रतीक माना था, लेकिन आज बोलने की आजादी ही खतरे में है। वहीं, सुषमा स्वराज के उस बयान को याद किया जिसमें उन्होंने कहा था कि राजनीति में हम एक-दूसरे के विरोधी हो सकते हैं, शत्रु नहीं। गोगोई ने अफसोस जताते हुए कहा कि आज कांग्रेस, टीएमसी और सपा जैसे दलों के नेताओं को दुश्मन की तरह देखा जाता है और उन्हें लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।

विदेश नीति और ट्रेड डील पर घेरा: “56 इंच का सीना” और “मन की बात”

गोगोई ने सरकार की विदेश नीति पर कड़ा प्रहार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी को निशाने पर लिया। उन्होंने सवाल उठाया कि मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच भारत की भूमिका स्पष्ट क्यों नहीं है? उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि वह “56 इंच के सीने” वाली विदेश नीति कहां गई जब देश का नेतृत्व वैश्विक संकटों पर चुप है। साथ ही, उन्होंने अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील पर भी संदेह जताया। गोगोई ने पूछा कि क्या किसी खास उद्योगपति या मंत्री का नाम अंतरराष्ट्रीय जांच में आने की वजह से भारत सरकार किसी बाहरी दबाव में काम कर रही है?

किरेन रिजिजू का करारा जवाब: “एलओपी को भी लेनी पड़ती है अनुमति”

गौरव गोगोई के आरोपों पर संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने तीखा पलटवार किया। गोगोई को ‘छोटा भाई’ बताते हुए रिजिजू ने कहा कि सदन का अनुभव होने के बावजूद वे बुनियादी नियमों को भूल रहे हैं। रिजिजू ने स्पष्ट किया कि चाहे प्रधानमंत्री हों या नेता प्रतिपक्ष, सदन में बोलने के लिए चेयर की अनुमति अनिवार्य है। उन्होंने कांग्रेस के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष ने कभी अपने पुराने नेताओं नेहरू और राजीव गांधी को ठीक से नहीं पढ़ा। रिजिजू ने याद दिलाया कि नेहरू जी के अनुसार अध्यक्ष का सम्मान पूरी सभा का सम्मान है और उन पर उंगली उठाना खुद पर सवाल खड़े करने जैसा है।

स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: रिजिजू ने गिनाईं विपक्ष की गलतियां

40 साल बाद लोकसभा स्पीकर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर रिजिजू ने कहा कि विपक्ष हताशा में ऐसे कदम उठा रहा है। उन्होंने विपक्ष को उनकी पुरानी हरकतों की याद दिलाते हुए कहा कि हमने कभी सदन में कागज फाड़कर नहीं फेंके और न ही महासचिव की मेज पर चढ़े। उन्होंने कहा कि विपक्ष को विनम्रता सीखनी चाहिए और सदन के भीतर अराजकता फैलाने के बजाय लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करना चाहिए। रिजिजू ने साफ किया कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए तय प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी है।

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