Parliament debate India : मानसून सत्र की पूर्व संध्या पर रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक में केंद्र सरकार ने विपक्ष को आश्वस्त किया कि वह संसद में डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता की मांग, ऑपरेशन सिंदूर और पहलगांव हमले जैसे सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने यह जानकारी दी और साथ ही विपक्ष से संसद के सुचारू संचालन में सहयोग की अपील भी की।
संसद का आगामी मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होकर 21 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) के उपलक्ष्य में छुट्टी रहेगी, जबकि 13 और 14 अगस्त को कोई बैठक नहीं होगी, जिससे कुल मिलाकर 21 कार्य दिवसों का सत्र निर्धारित किया गया है। “सरकार ऑपरेशन सिंदूर और डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता जैसी महत्वपूर्ण संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। विपक्ष जो भी सवाल पूछेगा, सरकार उसका ठोस और तथ्यों पर आधारित जवाब देगी। लेकिन हम चाहते हैं कि ये चर्चाएं रचनात्मक और मुद्दों पर केंद्रित हों।”उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष को भी संसद की गरिमा बनाए रखने में भूमिका निभानी चाहिए।
बैठक के दौरान विपक्षी दलों ने मांग की कि ऑपरेशन सिंदूर और पहलगांव हमले को लेकर एक विशेष सत्र बुलाया जाए। उनका तर्क था कि ये घटनाएं देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा से जुड़ी हैं, और इन पर विस्तृत बहस आवश्यक है। हालांकि केंद्र सरकार ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया, लेकिन संकेत दिए कि सामान्य सत्र के दौरान भी इन मुद्दों पर प्रश्नोत्तर और अल्पकालिक चर्चा की अनुमति दी जा सकती है।
शुरुआत में मोदी सरकार ने इन मुद्दों पर चर्चा से बचना चाहा था, खासकर भारत-पाक युद्धविराम और ट्रंप की टेरिफ धमकी जैसे विषयों पर। लेकिन विपक्षी दबाव और जनता की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार अब पीछे हटने की स्थिति में नहीं है।
भाजपा नेतृत्व ने भी माना है कि इन मुद्दों से पूरी तरह पल्ला झाड़ना संभव नहीं है, इसलिए संसद में सामना करना ही बेहतर होगा।
यह सत्र अहमदाबाद रेल हादसे के बाद पहला संसदीय सत्र होगा, जिससे इस विषय पर भी हंगामे की संभावना है। वहीं, बिहार में मतदाता सूची के पुनरीक्षण और संभावित गड़बड़ियों को लेकर भी विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है। राजद और कांग्रेस पहले ही चुनाव आयोग और गृह मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांग चुके हैं। मोदी सरकार ने संसद में ट्रंप की धमकी, ऑपरेशन सिंदूर और अन्य संवेदनशील मुद्दों पर खुले मंच पर चर्चा की अनुमति देकर यह स्पष्ट संकेत दिया है कि वह लोकतांत्रिक विमर्श से पीछे नहीं हटेगी। अब यह विपक्ष की ज़िम्मेदारी है कि वह बहस को वास्तविक मुद्दों पर केंद्रित रखते हुए संसद की मर्यादा बनाए रखे।
बादल सत्र के पहले ही दिन माहौल गरम रहने की पूरी संभावना है।
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