Parliament Winter Session
Parliament Winter Session: आज से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो गया है, जो 19 दिसंबर तक चलेगा। सत्र शुरू होने के साथ ही, हंगामे के आसार साफ-साफ दिख रहे हैं, और देखना यह है कि यह गतिरोध पहले दिन से शुरू होता है या एक-दो दिन बाद। सत्र की शुरुआत से पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन स्थित हंस द्वार पर मीडिया को संबोधित किया और देश की प्रगति पर ज़ोर दिया।
एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी मीडिया से बात कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ शीतकालीन सत्र के लिए अपनी रणनीति बनाने में जुटा हुआ था। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में सुबह 10 बजे गठबंधन के नेताओं की बैठक हुई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रमुख राष्ट्रीय मुद्दों पर गठबंधन के रुख में समन्वय स्थापित करना और संसद के भीतर एक एकीकृत दृष्टिकोण सुनिश्चित करना था।
पहले दिन, विपक्षी दल कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन करने की संभावना जता रहे हैं। विपक्ष की तरफ से मुख्य रूप से एसआईआर (SIR) मुद्दे और कई राज्यों में बीएलओ (BLO) की मौतों को उठाया जाएगा। इसके अलावा, नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस नेताओं की मुश्किलें भी सत्र से ठीक पहले बढ़ गई हैं। इस मामले में राहुल गांधी, सोनिया गांधी और अन्य के नाम वाली एक नई एफआईआर (FIR) के समय ने संसद में तनाव को और बढ़ा दिया है। इस एफआईआर की टाइमिंग को लेकर भी विपक्ष सरकार पर हमलावर हो सकता है।
संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया को संबोधित करते हुए देश की आर्थिक प्रगति पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, “भारत की आर्थिक उन्नति आज उल्लेखनीय ऊंचाइयों को छू रही है। यह गति हमें एक विकसित राष्ट्र बनने की राह पर नए सिरे से आत्मविश्वास देती है।” पीएम मोदी ने सांसदों और पूरी संसद से आग्रह किया कि उनका ध्यान इस बात पर केंद्रित रहना चाहिए कि वह देश के लिए क्या सोच रही है और क्या करना चाहती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष को उसकी ज़िम्मेदारी निभाने की सलाह दी और तंज कसते हुए कहा कि उन्हें “हार के गम से उबरना चाहिए।” उन्होंने कहा, “कुछ लोग तो ऐसे हैं कि पराजय ही नहीं पचा पाते हैं। मैं सोच रहा था कि बिहार के नतीजे आए गए हैं वो संभल गए होंगे। लेकिन कल जो बयान आए हैं, उससे ऐसा लगता है कि उनको पराजय ने जकड़ रखा है।” पीएम मोदी ने विपक्ष से आग्रह किया कि “पराजय की बौखलाहट को मैदान नहीं बनाना चाहिए।”
इसी के साथ, उन्होंने अपनी पार्टी को भी संदेश दिया और कहा कि “शीतकालीन सत्र विजय के अहंकार में भी नहीं बदलना चाहिए।” उन्होंने जोर देकर कहा कि संसद को देश के लिए किए जाने वाले मुद्दों पर केंद्रित होना चाहिए।
पीएम मोदी ने शीतकालीन सत्र के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल एक रिचुअल (Ritual) नहीं है, बल्कि “राष्ट्र को प्रगति की ओर तेज गति से ले जाने के जो प्रयास चल रहे हैं उसमें ऊर्जा भरने का काम शीतकालीन सत्र करेगा।”
उन्होंने भारतीय लोकतंत्र की प्रशंसा करते हुए कहा, “भारत ने लोकतंत्र को जिया है, लोकतंत्र के उमंग और उत्साह को ऐसे प्रकट किया है जो समय-समय पर विश्वास और मजबूत होता रहता है।” उन्होंने हाल ही में हुए बिहार चुनावों का उदाहरण दिया, जहां मतदान की उच्च दर को लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया भारत की लोकतंत्र की मजबूती और लोकतांत्रिक संस्थाओं के भीतर की मजबूती को बहुत बारीकी से देख रही है।
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