Pawan Khera Case
Pawan Khera Case: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर तेलंगाना हाईकोर्ट में गहमागहमी भरी सुनवाई हुई। अदालत ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है, जिसे शुक्रवार को सुनाए जाने की प्रबल संभावना है। खेड़ा की ओर से देश के दिग्गज वकील और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने वर्चुअली पक्ष रखा। सिंघवी ने अदालत में पुरजोर तरीके से कहा कि असम सरकार द्वारा दर्ज की गई एफआईआर पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है। उन्होंने दलील दी कि विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है और यह मामला केवल राजनीतिक छवि धूमिल करने की कोशिश है।
विवाद की जड़ में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोप हैं। पवन खेड़ा ने दावा किया था कि रिंकी भुइयां के पास कई देशों के पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्ति है। इन बयानों के बाद असम पुलिस ने खेड़ा के खिलाफ मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। कार्रवाई को तेज करते हुए असम पुलिस की एक टीम दिल्ली में खेड़ा के आवास पर भी पहुंची थी, लेकिन वे वहां नहीं मिले। इसके बाद पुलिस ने उनके घर के बाहर बैरिकेडिंग कर दी और उनकी पत्नी के हैदराबाद स्थित निवास पर भी चौकसी बढ़ा दी गई है।
सुनवाई के दौरान असम के एडवोकेट जनरल देवजीत सैकिया ने पवन खेड़ा की याचिका पर तकनीकी आपत्ति जताई। उन्होंने हैदराबाद में अग्रिम जमानत याचिका दायर करने की वैधता को चुनौती देते हुए सवाल किया कि दिल्ली के निवासी होने के बावजूद खेड़ा ने असम की अदालतों का रुख क्यों नहीं किया? उन्होंने दलील दी कि आरोपी ने ऐसा कोई ठोस कारण पेश नहीं किया है जो उन्हें असम में कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बनने से रोकता हो। दूसरी ओर, खेड़ा के वकीलों ने ‘ट्रांजिट अग्रिम जमानत’ की मांग की है ताकि वे बिना गिरफ्तारी के डर के असम की संबंधित अदालत में पेश होकर अपना पक्ष रख सकें।
पिछले कुछ दिनों से सार्वजनिक रूप से नजर न आने वाले पवन खेड़ा ने एक अज्ञात स्थान से वीडियो जारी कर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर सीधा हमला बोला। कांग्रेस के आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल से साझा किए गए इस वीडियो में खेड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री को पुलिस के पीछे छिपने के बजाय उन पर और उनकी पत्नी पर लगे आरोपों का तार्किक जवाब देना चाहिए। उन्होंने कड़े लहजे में कहा, “हम राहुल गांधी के सिपाही हैं और ऐसी दमनकारी कार्रवाइयों से डरने वाले नहीं हैं।” खेड़ा ने स्पष्ट किया कि वे संवैधानिक दायरे में रहकर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर सवाल पूछना जारी रखेंगे।
तेलंगाना हाईकोर्ट की जस्टिस के. सुजाना इस मामले में शुक्रवार को अपना आदेश सुनाएंगी। यह फैसला न केवल पवन खेड़ा के लिए व्यक्तिगत रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह अभिव्यक्ति की आजादी और राजनीतिक आरोपों के बीच की कानूनी सीमा को भी परिभाषित करेगा। क्या अदालत खेड़ा को असम जाने के लिए सुरक्षा प्रदान करेगी या उन्हें सीधे असम पुलिस की प्रक्रिया का सामना करना होगा, यह कल स्पष्ट हो जाएगा। फिलहाल, इस हाई-प्रोफाइल मामले ने असम से लेकर दिल्ली और हैदराबाद तक राजनीतिक माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है।
आरोप: सीएम की पत्नी पर फर्जी पासपोर्ट और अघोषित संपत्ति का दावा।
पुलिस कार्रवाई: दिल्ली और हैदराबाद में पुलिस की दबिश और बैरिकेडिंग।
कांग्रेस का रुख: आरोपों को लोकतंत्र और विपक्ष पर हमला बताया।
हाईकोर्ट की स्थिति: दलीलें पूरी, निर्णय के लिए शुक्रवार का दिन तय।
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