PAX Silica
PAX Silica: भारत ने वैश्विक तकनीक और आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। नई दिल्ली में आयोजित ‘AI इम्पैक्ट समिट’ के दौरान भारत आधिकारिक तौर पर अमेरिका के नेतृत्व वाले ‘पैक्स सिलिका’ (Pax Silica) गठबंधन का हिस्सा बन गया। इस समारोह में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और भारत में अमेरिकी दूत सर्जियो गोर की उपस्थिति में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। भारत के शामिल होते ही इस रणनीतिक गठबंधन में हस्ताक्षरकर्ता देशों की कुल संख्या 10 हो गई है। यह कदम न केवल भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिलाएगा, बल्कि महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को सुरक्षित करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, ‘पैक्स सिलिका’ एआई और सप्लाई चेन को सुरक्षित करने का एक प्रमुख वैश्विक प्रयास है। “पैक्स” शब्द ऐतिहासिक रूप से शांति और समृद्धि का प्रतीक है। जिस तरह 20वीं सदी में तेल और स्टील ने दुनिया की शक्ति तय की थी, उसी तरह 21वीं सदी में कंप्यूटर और एआई मॉडल वैश्विक व्यवस्था को नियंत्रित करेंगे। पैक्स सिलिका का मुख्य उद्देश्य भरोसेमंद देशों के साथ मिलकर एक ऐसा पारदर्शी ढांचा तैयार करना है, जहाँ ऊर्जा, दुर्लभ खनिज, हाई-टेक फैक्ट्रियां और एआई मॉडल सुरक्षित रूप से विकसित किए जा सकें। यह गठबंधन तकनीकी विकास के साथ-साथ आर्थिक संप्रभुता की रक्षा पर जोर देता है।
इस गठबंधन के सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्यों में से एक है रेयर अर्थ मेटल्स (Rare Earth Metals) की सप्लाई चेन को सुरक्षित करना। वर्तमान में चीन दुनिया के 60-70 प्रतिशत रेयर अर्थ खनिजों के खनन पर हावी है। ये 17 दुर्लभ धातुएं स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों, हथियारों, एयरोस्पेस और सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए अनिवार्य हैं। ‘पैक्स सिलिका’ के जरिए भारत और उसके सहयोगी देश किसी एक देश (विशेषकर चीन) पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं। इसका लक्ष्य एक ऐसी विविधतापूर्ण सप्लाई चेन बनाना है, जहाँ किसी भी देश पर व्यापारिक दबाव या शोषण की स्थिति पैदा न हो सके।
पैक्स सिलिका घोषणापत्र के अनुसार, सभी भागीदार देश निवेश सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए आर्थिक साझेदारी को मजबूत करेंगे। सहयोग के दायरे में सॉफ्टवेयर विकास, एआई मॉडल, सेमीकंडक्टर निर्माण, फाइबर ऑप्टिक केबल और सुरक्षित डेटा सेंटर शामिल हैं। सदस्य देश इस बात पर सहमत हुए हैं कि वे गलत बाजार प्रथाओं से मिलकर निपटेंगे और संवेदनशील तकनीकों की चोरी रोकेंगे। यह समझौता भरोसेमंद आईसीटी (ICT) नेटवर्क बनाने पर केंद्रित है, ताकि भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था किसी भी बाहरी खतरे से सुरक्षित रहे।
पैक्स सिलिका अब एक शक्तिशाली वैश्विक समूह बन चुका है। इसमें शामिल होने वाले 10 प्रमुख हस्ताक्षरकर्ता देशों में भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इजरायल, जापान, कतर, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं। इनके अलावा, कनाडा, नीदरलैंड, ताइवान, यूरोपीय संघ और OECD जैसे महत्वपूर्ण संगठन भी बिना हस्ताक्षर किए इस गठबंधन के साथ गहराई से जुड़े हुए हैं। भारत की इसमें मौजूदगी न केवल इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसकी स्थिति मजबूत करेगी, बल्कि देश में हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और एआई अनुसंधान के नए द्वार खोलेगी।
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