Persistent Back Pain : अगर आपको पिछले कई दिनों से लगातार पीठ दर्द हो रहा है, तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। कई बार लंबे समय तक बने रहने वाला दर्द मांसपेशियों में खिंचाव, रीढ़ की हड्डी से जुड़ी परेशानी या नसों पर दबाव का संकेत हो सकता है। नई दिल्ली स्थित बीएलके-मैक्स हॉस्पिटल के प्रिंसिपल डायरेक्टर एवं हेड और ऑर्थो स्पाइन सर्जन डॉ. पुनीत गिरधर के अनुसार, पीठ दर्द के कारणों को समझना और जरूरत पड़ने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना महत्वपूर्ण है। हालांकि, केवल दर्द के आधार पर किसी गंभीर बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती।
मांसपेशियों और लिगामेंट में खिंचाव से हो सकता है दर्द
पीठ दर्द का एक आम कारण मांसपेशियों या लिगामेंट में खिंचाव होना है। भारी सामान उठाने, अचानक झुकने, गलत तरीके से मुड़ने या गिरने के कारण पीठ के ऊतकों पर दबाव पड़ सकता है। शारीरिक गतिविधियों की कमी और कमजोर मांसपेशियां भी परेशानी बढ़ा सकती हैं। ऐसे मामलों में दर्द के साथ अकड़न या मांसपेशियों में ऐंठन महसूस हो सकती है। सही आराम और जरूरत के अनुसार उपचार से राहत मिल सकती है, लेकिन दर्द लंबे समय तक बना रहे तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
उभरी हुई डिस्क भी बन सकती है पीठ दर्द की वजह
रीढ़ की हड्डी के बीच मौजूद डिस्क कुशन की तरह काम करती हैं और हड्डियों पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद करती हैं। उम्र बढ़ने, चोट या अन्य कारणों से डिस्क बाहर की ओर उभर सकती है। कुछ स्थितियों में इससे आसपास की नसों पर दबाव पड़ता है, जिसके कारण पीठ में दर्द के साथ पैरों तक दर्द, झुनझुनी या सुन्नपन महसूस हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है, ताकि समस्या की सही वजह का पता लगाया जा सके।
ऑस्टियोआर्थराइटिस और स्पाइनल स्टेनोसिस का खतरा
ऑस्टियोआर्थराइटिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें जोड़ों के ऊतकों में धीरे-धीरे बदलाव होने लगते हैं। यह रीढ़ के जोड़ों को भी प्रभावित कर सकता है और पीठ के निचले हिस्से में दर्द या अकड़न पैदा कर सकता है। कुछ लोगों में रीढ़ की नलिका संकरी हो जाती है, जिसे स्पाइनल स्टेनोसिस कहा जाता है। इससे नसों पर दबाव पड़ सकता है और चलने या खड़े रहने में परेशानी हो सकती है। हालांकि, पीठ दर्द के हर मामले का कारण गठिया या स्पाइनल स्टेनोसिस नहीं होता।
पीठ दर्द से बचाव के लिए अपनाएं ये आदतें
पीठ को स्वस्थ रखने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि, सही पोश्चर और संतुलित वजन बनाए रखना मददगार हो सकता है। पैदल चलना, अपनी क्षमता के अनुसार एरोबिक गतिविधियां करना और विशेषज्ञ की सलाह से कोर मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाले व्यायाम अपनाना उपयोगी है। भारी सामान उठाते समय कमर पर अचानक जोर डालने से बचें। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने के बजाय बीच-बीच में उठकर चलें। दर्द बढ़ाने वाले व्यायाम न करें और लगातार परेशानी होने पर फिजियोथेरेपिस्ट या डॉक्टर से सलाह लें।
इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
यदि पीठ में तेज दर्द आराम करने पर भी कम नहीं होता, दर्द पैर तक फैलता है या पैरों में कमजोरी, सुन्नपन अथवा झुनझुनी होती है, तो चिकित्सकीय जांच कराएं। बिना स्पष्ट कारण वजन कम होना भी ध्यान देने योग्य संकेत है। पेशाब या मल पर नियंत्रण में परेशानी, जांघों के बीच सुन्नपन या अचानक पैरों में गंभीर कमजोरी होने पर तुरंत इमरजेंसी में जाएं। समय पर जांच कराने से सही कारण का पता लगाने और उचित उपचार शुरू करने में मदद मिल सकती है।
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