Ambikapur News : पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। राहत के दावों पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोलते हुए इन्हें “भ्रामक” करार दिया है और आरोप लगाया है कि सरकार की घोषणाओं का जमीनी स्तर पर आम जनता को कोई फायदा नहीं मिल रहा, जबकि तेल कंपनियां लगातार लाभ में हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता आशीष वर्मा ने बयान जारी कर कहा कि यदि टैक्स घटाने से जनता को राहत मिल सकती है, तो छत्तीसगढ़ सरकार पेट्रोल-डीजल पर वैट कम क्यों नहीं करती। उन्होंने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री और पूरी भाजपा जहां राहत की बात कर रही है, वहीं प्रदेश में टैक्स कम करने की ठोस पहल क्यों नहीं दिख रही।
कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के बावजूद आम लोगों को इसका लाभ नहीं दिया गया। वर्ष 2014 में पेट्रोल पर जहां एक्साइज ड्यूटी 9–10 रुपये प्रति लीटर थी, उसे बढ़ाकर 30 रुपये प्रति लीटर से अधिक कर दिया गया। जबकि इसी अवधि में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से गिरकर कई बार 30–40 डॉलर तक पहुंची, लेकिन कीमतों में राहत देने के बजाय टैक्स बढ़ाकर वसूली जारी रही।
प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में पेट्रोलियम उत्पादों पर कर के जरिए केंद्र सरकार ने करीब 39 लाख करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया, लेकिन इसका लाभ आम जनता तक नहीं पहुंचा। उन्होंने इसे “मुनाफाखोरी” करार देते हुए पूछा कि आखिर इसका फायदा किसे मिला।
राज्य स्तर पर भी कांग्रेस ने वैट दरों को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पेट्रोल पर 24% वैट के साथ ₹1 प्रति लीटर सेस लिया जा रहा है, जबकि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में यह दर करीब 19.36% है। ऐसे में साफ है कि प्रदेश की जनता पर अधिक टैक्स का बोझ डाला जा रहा है। कांग्रेस ने अंत में सवाल उठाया कि जब अन्य राज्य कम वैट के जरिए जनता को राहत दे सकते हैं, तो छत्तीसगढ़ सरकार ऐसा क्यों नहीं कर रही।


















