राजनीति

PM CM Disqualification : 30 दिन की जेल पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों की कुर्सी जाएगी? JPC गठन पर विपक्ष में मतभेद, TMC ने दिखाया सख्त रुख

PM CM Disqualification : केंद्र सरकार द्वारा लाए गए उस विवादित विधेयक को लेकर सियासत गरमा गई है, जिसके तहत यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री को 30 दिन से अधिक की जेल होती है तो उनकी कुर्सी स्वतः चली जाएगी। इस बिल को संसदीय संयुक्त समिति (JPC) के पास भेज दिया गया है, लेकिन अब इसके गठन को लेकर विपक्षी दलों के बीच मतभेद उभरकर सामने आए हैं।

TMC समिति का हिस्सा नहीं बनेगी?

सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने संकेत दिया है कि वह समिति में अपने किसी भी सांसद को नहीं भेजेगी। टीएमसी नेताओं का मानना है कि संयुक्त समिति समय की बर्बादी है, क्योंकि सरकार के पास इस तरह के संविधान संशोधन बिल को पास कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत ही नहीं है। एक टीएमसी नेता ने कहा“अगर विपक्ष समिति में जाएगा, तो केंद्र सरकार वैसे ही कोई रास्ता निकाल लेगी जैसा उसने वक्फ बिल में किया था। इसलिए इस प्रक्रिया का बहिष्कार करना ही सही रास्ता है।”

INDIA ब्लॉक में मतभेद

इंडिया गठबंधन (INDIA Block) की बैठक में इस मुद्दे पर गहन चर्चा हुई। टीएमसी ने प्रस्ताव रखा कि पूरा विपक्ष इस समिति का बहिष्कार करे, लेकिन कांग्रेस और कई अन्य सहयोगी पार्टियों ने इसका विरोध किया। कांग्रेस का कहना है कि समिति ही एक ऐसा मंच है, जहां विपक्ष अपनी बात रख सकता है, सुझाव दे सकता है और सरकार को एक्सपोज कर सकता है। पार्टी ने यह भी साफ कर दिया कि अगर टीएमसी समिति से दूरी बनाती है, तब भी कांग्रेस अपने 4–5 सांसदों को भेजेगी। अन्य विपक्षी दल भी टीएमसी के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

बिल को विपक्षी सरकारें गिराने का हथियार बता रही TMC

टीएमसी का आरोप है कि मोदी सरकार इस बिल का इस्तेमाल विपक्षी सरकारों को अस्थिर करने और राजनीतिक हथियार की तरह करेगी। उनके अनुसार, यह बिल संवैधानिक रूप से टिक नहीं पाएगा क्योंकि इसे पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत चाहिए, जो एनडीए के पास नहीं है। मान लीजिए किसी तरह यह बिल संसद से पास हो भी जाए, तो अदालत में इसकी वैधता पर गंभीर सवाल खड़े होंगे टीएमसी नेताओं ने कहा कि यह विधेयक सिर्फ राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने का एक औजार है, जिसे जनता के मुद्दों से कोई लेना-देना नहीं है।

सरकार का तर्क

वहीं केंद्र सरकार के सूत्रों का कहना है कि यह विधेयक लोकतांत्रिक जवाबदेही की दिशा में एक अहम कदम है। उनका तर्क है कि अगर किसी जनप्रतिनिधि को गंभीर आरोपों के चलते एक महीने से ज्यादा जेल की सजा मिलती है, तो नैतिक दृष्टि से उसका पद पर बने रहना उचित नहीं है। फिलहाल, समिति का गठन तभी हो पाएगा जब सभी दल अपने प्रतिनिधियों के नाम भेजेंगे। ऐसे में टीएमसी का रुख विपक्षी एकजुटता के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। अगर कांग्रेस और अन्य INDIA ब्लॉक पार्टियां समिति में शामिल होती हैं और टीएमसी बाहर रहती है, तो विपक्षी एकता की तस्वीर पर असर पड़ सकता है। इस बीच, सियासी विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आगामी चुनावों में लोकतंत्र बनाम सत्ता का दुरुपयोग जैसी बहस को हवा देगा।

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