PM Modi Dimaagi Naxal Remark: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता और CJP के आशुतोष रांका ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस मुद्दे को सरकारी स्कूलों की स्थिति और ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं से जोड़ते हुए कई सवाल उठाए। रांका का कहना है कि आजादी के 80 वर्ष बाद भी देश के ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में बच्चे शिक्षा से जुड़ी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।


ग्रामीण बच्चों की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
आशुतोष रांका ने कहा कि गांवों में रहने वाले बच्चों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। उनके मुताबिक, शिक्षा किसी भी बच्चे के बेहतर भविष्य की पहली सीढ़ी है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कई सरकारी स्कूल अभी भी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। उन्होंने स्कूलों में उपलब्ध संसाधनों, शिक्षा के स्तर और बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर सरकार तथा प्रशासन से गंभीरता से काम करने की अपील की।

95 हजार स्कूल बंद होने का दावा
रांका ने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान देश में करीब 95 हजार स्कूल बंद हुए हैं। उन्होंने राजस्थान और उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि राजस्थान में लगभग 10 हजार स्कूलों को बंद करने की कोशिश की गई, जबकि उत्तर प्रदेश में करीब 30 हजार स्कूल बंद किए गए। हालांकि, ये आंकड़े उनके द्वारा किए गए दावे हैं और इनके आधिकारिक स्रोत या विस्तृत संदर्भ अलग से स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।
सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने का अभियान
आशुतोष रांका ने बताया कि सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के उद्देश्य से उनकी ओर से अभियान चलाया जा रहा है। उनका कहना है कि इस अभियान का मकसद सरकारी शिक्षा व्यवस्था की कमियों को सामने लाना और बच्चों को बेहतर बुनियादी शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए सरकार पर जिम्मेदारी तय करना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किए बिना ग्रामीण बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाना मुश्किल होगा।
लोगों से सरकारी स्कूलों का दौरा करने की अपील
रांका ने आम लोगों से अपने-अपने क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों का दौरा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि केवल सरकार से सवाल करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नागरिकों को भी अपने आसपास के स्कूलों की स्थिति को समझना चाहिए। लोगों को स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं, शिक्षकों की स्थिति और बच्चों को मिल रही बुनियादी सुविधाओं का जायजा लेकर संबंधित अधिकारियों तक अपनी शिकायत पहुंचानी चाहिए।

सरपंच और प्रशासन से संवाद की मांग
उन्होंने ग्रामीण इलाकों के लोगों से स्थानीय सरपंच और प्रशासनिक अधिकारियों से मिलने की अपील की। रांका के अनुसार, यदि किसी सरकारी स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की कमी है या बच्चों को किसी तरह की परेशानी हो रही है, तो स्थानीय स्तर पर शिकायत दर्ज कराई जानी चाहिए। उनका मानना है कि जनभागीदारी से स्कूलों की समस्याओं को प्रशासन तक प्रभावी तरीके से पहुंचाया जा सकता है।
समस्या दूर नहीं हुई तो प्रदर्शन की अपील
आशुतोष रांका ने कहा कि यदि शिकायतों के बावजूद सरकारी स्कूलों की समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता है, तो लोगों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने प्रदर्शन का भी आह्वान किया और कहा कि बच्चों के लिए बुनियादी शिक्षा सुनिश्चित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उनका कहना है कि बच्चों के भविष्य से जुड़े सवालों पर चुप नहीं बैठा जा सकता।
शिक्षा को अधिकार बताते हुए अभियान जारी
रांका ने कहा कि उनकी मुहिम का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाना और ग्रामीण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण बुनियादी शिक्षा दिलाना है। उन्होंने लोगों से शिक्षा व्यवस्था को लेकर जागरूक होने और अपने क्षेत्र के स्कूलों की स्थिति पर नजर रखने की अपील की। उनका कहना है कि बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार, प्रशासन और समाज—तीनों को मिलकर काम करना जरूरी है।











