Nari Shakti Vandan Adhiniyam : देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को नई ऊंचाई देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ा कदम उठाया है। शनिवार को पीएम मोदी ने लोकसभा और राज्यसभा के सभी राजनीतिक दलों के ‘फ्लोर लीडर्स’ को पत्र लिखकर ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर सर्वसम्मत समर्थन की अपील की। प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया कि अब वह समय आ गया है जब महिला आरक्षण के सपने को पूरे देश में धरातल पर उतारा जाए। उन्होंने विश्वास जताया कि महिलाओं को राजनीति के शीर्ष स्तर पर प्रतिनिधित्व देना किसी एक दल का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का साझा संकल्प होना चाहिए।

2029 के चुनावों में ऐतिहासिक बदलाव: आरक्षण के साथ होगा मतदान
प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में भविष्य की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए लिखा कि 2029 के लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों के साथ कराए जाने चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि लंबे समय से सभी राजनीतिक दलों ने महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने की इच्छा जताई है, लेकिन अब इसे हकीकत में बदलने का निर्णायक अवसर है। यह अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को सशक्त बनाने और लोकतंत्र को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया: मल्लिकार्जुन खड़गे ने उठाए सरकार की मंशा पर सवाल
प्रधानमंत्री के पत्र के जवाब में कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी जवाबी पत्र लिखा है। खड़गे ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य चुनावों के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाना यह संकेत देता है कि सरकार इस कानून को राजनीतिक लाभ के लिए जल्दबाजी में थोपना चाहती है। उन्होंने मांग की कि सरकार को इस संवेदनशील मुद्दे पर पहले एक सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। खड़गे ने विशेष रूप से परिसीमन (Delimitation) से जुड़े तकनीकी और जटिल मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया।

लोकसभा की सीटों में भारी वृद्धि: 543 से बढ़कर 816 होगी सदस्य संख्या
हाल ही में पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस अधिनियम के संशोधन ड्राफ्ट को मंजूरी दी गई, जिसमें कई क्रांतिकारी बदलाव प्रस्तावित हैं। इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा की कुल सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 करने की योजना है। इस नए ढांचे में 273 सीटें सीधे तौर पर महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। इसी अनुपात में राज्यों की विधानसभाओं और केंद्र शासित प्रदेशों जैसे दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी में भी सीटों का आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।
विशेष सत्र और परिसीमन की प्रक्रिया: 2011 की जनगणना बनेगी आधार
इस महत्वपूर्ण कानून को पारित कराने के लिए सरकार ने मौजूदा बजट सत्र की अवधि को बढ़ाते हुए 16 से 18 अप्रैल 2026 तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है। संसद की मुहर लगने के बाद यह कानून 31 मार्च 2029 से प्रभावी होगा। खास बात यह है कि नई सीटों का निर्धारण 2027 की संभावित जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर किया जा सकता है। सरकार इस प्रक्रिया के लिए संविधान संशोधन बिल के साथ-साथ परिसीमन कानून में संशोधन के लिए एक साधारण बिल भी पेश करेगी। यह कदम भविष्य के भारतीय लोकतंत्र की तस्वीर को पूरी तरह बदलने वाला साबित होगा।
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