PM Modi-Pezeshkian Meeting : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित SCO समिट में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। इसी दौरान उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से मुलाकात की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब ईरान और अमेरिका के बीच फरवरी से युद्ध की स्थिति बनी हुई है। इस घटनाक्रम के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली आमने-सामने की मुलाकात बताई जा रही है। हालांकि, बैठक में किन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार आमने-सामने आए दोनों नेता
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की मुलाकात को मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फरवरी में ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ा है। ऐसे समय में दोनों नेताओं की बैठक पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर है। हालांकि, अभी तक भारत या ईरान की ओर से इस बैठक को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि वार्ता का मुख्य एजेंडा क्या रहा।
फरवरी से ईरानी नेतृत्व के संपर्क में हैं पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फरवरी से ही ईरान के शीर्ष नेतृत्व के साथ लगातार संपर्क में रहे हैं। संघर्ष के बाद भारत की ओर से लगातार यह संदेश दिया गया है कि किसी भी विवाद का समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत और कूटनीति के माध्यम से निकाला जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने विभिन्न मौकों पर क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम करने की जरूरत पर जोर दिया है। भारत का रुख रहा है कि तनाव कम करने के लिए सभी संबंधित पक्षों के बीच संवाद का रास्ता खुला रहना चाहिए।
बातचीत और कूटनीति को समाधान का रास्ता मानता है भारत
ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच भारत ने कूटनीतिक समाधान पर अपना जोर बरकरार रखा है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वैश्विक और क्षेत्रीय विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने के प्रयास किए जाने चाहिए। भारत का मानना है कि लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष किसी भी क्षेत्र के लिए स्थिरता और विकास के लिहाज से नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में संवाद और कूटनीति के माध्यम से तनाव कम करना जरूरी है।
मध्य पूर्व की स्थिरता भारत के लिए अहम
मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता। इस क्षेत्र में अस्थिरता का प्रभाव ऊर्जा बाजार, व्यापार, परिवहन और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी पड़ सकता है। भारत के लिए यह मुद्दा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि पश्चिम एशिया के साथ उसके व्यापारिक और रणनीतिक संबंध काफी व्यापक हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर लगातार जोर दिया है।
वैश्विक सप्लाई चेन को बचाने पर भारत का जोर
भारत ने संघर्ष के बीच वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित होने से बचाने की जरूरत भी रेखांकित की है। युद्ध और क्षेत्रीय तनाव के कारण समुद्री मार्गों, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में भारत चाहता है कि क्षेत्रीय परिस्थितियां जल्द सामान्य हों और वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर इसका व्यापक प्रभाव न पड़े।
SCO समिट के दौरान मुलाकात पर टिकी नजरें
बिश्केक में SCO समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की ईरानी राष्ट्रपति से हुई मुलाकात इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि दोनों देशों के संबंधों में ईरान की रणनीतिक स्थिति महत्वपूर्ण है। क्षेत्रीय घटनाक्रम के बीच दोनों नेताओं के बीच बातचीत को भारत की पश्चिम एशिया नीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, बैठक के परिणाम या चर्चा के मुद्दों पर आधिकारिक जानकारी आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी।
आधिकारिक बयान का अभी इंतजार
फिलहाल भारत और ईरान दोनों पक्षों की ओर से बैठक के एजेंडे या बातचीत के निष्कर्ष को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसलिए यह कहना संभव नहीं है कि दोनों नेताओं ने ईरान-अमेरिका संघर्ष, क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा या अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर कितनी विस्तार से चर्चा की। आने वाले समय में दोनों देशों की ओर से जारी होने वाली जानकारी इस मुलाकात के महत्व और परिणाम को स्पष्ट कर सकती है।
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