Nari Shakti Vandan Sammelan : महिला सशक्तिकरण की दिशा में सोमवार का दिन भारत के लिए ऐतिहासिक होने जा रहा है। राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन में सुबह 11 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ का उद्घाटन करेंगे। इस भव्य आयोजन में प्रधानमंत्री देशभर से आईं विभिन्न क्षेत्रों की प्रभावशाली महिलाओं को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम की सबसे खास बात यह होगी कि पीएम मोदी अलग-अलग सेक्टरों में अपनी पहचान बनाने वाली महिलाओं के साथ सीधा संवाद करेंगे और उनके अनुभवों को जानेंगे। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य महिला आरक्षण कानून में प्रस्तावित संशोधनों पर चर्चा करना और उनके क्रियान्वयन की राह प्रशस्त करना है।

दिग्गज हस्तियों की मौजूदगी: पंचायत से पार्लियामेंट तक गूंजेगी आवाज
इस सम्मेलन में महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी यादव, राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर जैसी महत्वपूर्ण हस्तियां शामिल होंगी। कार्यक्रम का मुख्य नारा ‘पंचायत से पार्लियामेंट तक, निर्णय में नारी, नव भारत की तैयारी’ रखा गया है। यह सम्मेलन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह 16 अप्रैल से शुरू होने वाले संसद के विशेष सत्र से ठीक पहले आयोजित हो रहा है। इस विशेष सत्र का मुख्य एजेंडा लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाले संविधान संशोधन बिलों को अमलीजामा पहनाना है।
विकसित भारत के लिए ‘विमेन लेड डेवलपमेंट’ पर सरकार का फोकस
प्रधानमंत्री मोदी का स्पष्ट विजन है कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ‘विमेन लेड डेवलपमेंट’ (महिलाओं के नेतृत्व में विकास) अनिवार्य है। इस सम्मेलन के जरिए यह संदेश दिया जाएगा कि देश की प्रगति के लिए महिलाओं का नीति-निर्धारण और नेतृत्व के पदों पर आना जरूरी है। इस कार्यक्रम में शिक्षा, विज्ञान, खेल, मीडिया, उद्यमिता और संस्कृति जैसे विभिन्न क्षेत्रों की महिला उपलब्धियों को एक मंच पर लाया जाएगा। इसके लिए सभी वर्तमान महिला सांसदों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। पीएम मोदी ने पहले ही सभी राजनीतिक दलों से इन संशोधनों का समर्थन करने की भावुक अपील की है।
संसद का विशेष सत्र और नारी शक्ति वंदन अधिनियम का महत्व
सितंबर 2023 में संसद द्वारा पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ विधायिका में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम था। इस कानून में लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है। अब पूरे देश में इसे लागू करने पर फोकस करते हुए बजट सत्र की अवधि बढ़ा दी गई है और 16 अप्रैल से तीन दिवसीय विशेष बैठक बुलाई गई है। नए प्रावधानों के अनुसार, लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 816 हो जाएगी, जिनमें से 273 सीटें विशेष रूप से महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, जो लोकतंत्र के स्वरूप को बदल देगा।
2029 से आरक्षण लागू करने की चुनौती और कानूनी बदलाव
वर्तमान प्रावधानों के अनुसार, महिला आरक्षण 2027 की जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन (डिलिमिटेशन) के आधार पर ही लागू हो सकता था, जिसका अर्थ था कि यह 2034 से पहले संभव नहीं था। हालांकि, सरकार की मंशा इसे 2029 के आगामी लोकसभा चुनाव से ही लागू करने की है। इसके लिए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी और कानूनी बदलावों की आवश्यकता है। सोमवार को होने वाला यह सम्मेलन इन्हीं प्रस्तावित परिवर्तनों पर विचार-विमर्श करने और एक व्यापक सहमति बनाने का प्रमुख मंच बनेगा, जिससे भारतीय राजनीति में महिलाओं की हिस्सेदारी का नया युग शुरू होगा।


















