PM Modi West Asia Crisis
PM Modi West Asia Crisis: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) में जारी युद्ध और तनावपूर्ण स्थितियों पर देश को संबोधित किया। उन्होंने वहां के हालातों को अत्यंत चिंताजनक बताते हुए कहा कि सरकार पूरी सतर्कता के साथ स्थिति पर नजर रख रही है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत की प्राथमिकता न केवल वैश्विक शांति है, बल्कि देश के भीतर ऊर्जा और आर्थिक स्थिरता बनाए रखना भी है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि युद्ध के कारण उत्पन्न होने वाले किसी भी संकट से निपटने के लिए भारत पूरी तरह तैयार है।
युद्ध के कारण वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के बीच, पीएम मोदी ने एक महत्वपूर्ण रणनीति का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि भारत अब अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए केवल कुछ देशों पर निर्भर नहीं है। पहले भारत 27 देशों से तेल का आयात करता था, लेकिन अब इस दायरे को बढ़ाकर 41 देशों तक पहुंचा दिया गया है। आयात में इस विविधीकरण (Diversification) का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के बावजूद भारत में पेट्रोल, डीजल और गैस की किल्लत न हो।
पश्चिम एशिया में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते हैं, जिनकी सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। पीएम ने जानकारी दी कि अब तक 3 लाख 75 हजार भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाया जा चुका है। इनमें अकेले ईरान से लौटे 1,000 भारतीय शामिल हैं, जिनमें 700 से अधिक मेडिकल छात्र हैं। भारतीय मिशन वहां 24 घंटे काम कर रहे हैं और हेल्पलाइन के जरिए लोगों को जरूरी सहायता प्रदान की जा रही है। संकट की इस घड़ी में सरकार अपने नागरिकों के साथ मजबूती से खड़ी है।
ऊर्जा को अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने पिछले दशक में कच्चे तेल के भंडारण (Strategic Petroleum Reserves) को प्राथमिकता दी है। वर्तमान में 65 लाख मीट्रिक टन तेल के रिजर्व की व्यवस्था पर तेजी से काम चल रहा है। सरकार विभिन्न देशों के सप्लायर्स के साथ निरंतर संपर्क में है ताकि उर्वरक और ईंधन लेकर आने वाले जहाजों का रास्ता सुरक्षित रहे। इसके लिए सहयोगी देशों के साथ कूटनीतिक स्तर पर संवाद जारी है ताकि सप्लाई चेन में कोई रुकावट न आए।
युद्ध के चलते ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित होने के बावजूद, भारत के पास पर्याप्त अन्न भंडार मौजूद है। पीएम मोदी ने बताया कि किसानों को खाद की कमी न हो, इसके लिए देश में 6 नए यूरिया प्लांट लगाए गए हैं और ‘मेड इन इंडिया’ नैनो यूरिया का विकल्प दिया गया है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले संकटों के दौरान भी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल के बावजूद किसानों को यूरिया की बोरी 300 रुपये से कम में उपलब्ध कराई थी। देश में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए पावर प्लांट्स में कोयले का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया गया है।
कूटनीतिक मोर्चे पर भारत की भूमिका को स्पष्ट करते हुए पीएम ने कहा कि उन्होंने पश्चिम एशिया के राष्ट्रप्रमुखों से सीधे बात की है और तनाव कम करने की अपील की है। भारत का रुख साफ है कि कमर्शियल जहाजों पर हमले और व्यापारिक मार्ग में रुकावट किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। सरकार ने एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है जो दैनिक आधार पर आयात-निर्यात की बाधाओं की निगरानी करती है, ताकि युद्ध का दुष्प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था पर कम से कम पड़े।
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