PM Modi skips UNGA : हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ नीतियों और अधिकारियों के बयान भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों में खटास पैदा कर रहे हैं। ट्रंप ने खुलकर कहा है कि वे भारत और रूस को खो चुके हैं, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। वहीं, क्वाड बैठक में भारत के शामिल होने को लेकर भी अनिश्चितता की खबरें आ रही हैं। इसी बीच, भारत ने भी बड़ा राजनीतिक फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वर्ष होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे, उनके स्थान पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर प्रतिनिधित्व करेंगे।

ट्रंप के बयान और भारत-यूएस संबंधों पर प्रभाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के समय में भारत के खिलाफ कई नीतिगत फैसले और बयान दिए हैं। अमेरिकी टैरिफ्स की नीतियां, जो भारत के निर्यात और व्यापार पर प्रभाव डाल रही हैं, ने दोनों देशों के बीच व्यावसायिक तनाव बढ़ा दिया है। ट्रंप ने यह तक कह दिया कि वे भारत और रूस को खो चुके हैं, जो अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़ा झटका माना जा रहा है। ऐसे बयान अमेरिका-भारत के रणनीतिक सहयोग के लिए चिंता का विषय बन गए हैं।

क्वाड बैठक में भारत की भागीदारी पर सस्पेंस
भारत को इस साल की क्वाड बैठक में भाग लेने के लिए बुलाया गया था। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि ट्रंप के पास भारत आने का कोई ठोस प्लान नहीं है। इस खबर से यह संकेत मिलता है कि भारत-अमेरिका के बीच राजनीतिक व कूटनीतिक तालमेल फिलहाल ठीक नहीं है। क्वाड जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय मंच में भारत की भूमिका और उसकी उपस्थिति पर सवाल उठना शुरू हो गया है।
पीएम मोदी का संयुक्त राष्ट्र महासभा से हटना
भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं में यह बड़ा बदलाव तब सामने आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में हिस्सा न लेने का फैसला किया। इस सत्र में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री एस. जयशंकर करेंगे। यह कदम अमेरिकी-भारतीय संबंधों में चल रहे तनाव की पृष्ठभूमि में काफी अहम माना जा रहा है।
विदेश मंत्री जयशंकर के नेतृत्व में भारत संयुक्त राष्ट्र में अपनी विदेश नीति और विकास एजेंडा को मजबूती से पेश करेगा। इसके साथ ही, विदेश मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया है कि भारत अपनी बहुपक्षीय कूटनीतिक प्रतिबद्धताओं को जारी रखेगा और क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर सक्रिय रहेगा।
क्या कहती है विशेषज्ञों की राय?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के बयान और टैरिफ नीतियां भारत-यूएस संबंधों में एक नई चुनौतियां लेकर आई हैं। हालांकि, भारत की विदेश नीति अधिक संतुलित और रणनीतिक है। पीएम मोदी का संयुक्त राष्ट्र महासभा से हटना संकेत है कि भारत अब अपने हितों के हिसाब से निर्णय ले रहा है। साथ ही, एस. जयशंकर जैसे अनुभवी कूटनीतिज्ञ के नेतृत्व में भारत की वैश्विक कूटनीति और भी मजबूती पाएगी।
अमेरिका और भारत के रिश्ते फिलहाल तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। ट्रंप के टैरिफ और उनके अधिकारियों के बयान दोनों देशों के बीच दूरी बढ़ा रहे हैं। भारत भी अपनी विदेश नीति में बदलाव करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा में पीएम मोदी की अनुपस्थिति का निर्णय ले चुका है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि दोनों देशों के बीच रिश्ते किस दिशा में बढ़ते हैं और क्या क्वाड जैसे रणनीतिक मंचों पर भारत अपनी भूमिका को और मजबूत कर पाता है।
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