Modi Viksit Bharat vision : भारत की कर प्रणाली का इतिहास हजारों वर्षों पुराना है, लेकिन आज जो कर क्रांति देश में देखी जा रही है, वह आधुनिक भारत के आर्थिक भविष्य की नींव रख रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 1 जुलाई 2017 को लागू हुआ वस्तु एवं सेवा कर (GST) न केवल देश की कर व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाने में सफल रहा है, बल्कि यह ‘विकसित भारत’ की ओर बढ़ते कदमों में एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है।
जीएसटी से पहले देश में 17 तरह के कर और 13 उपकर लागू थे, जो व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए जटिलता का कारण थे। जीएसटी के लागू होने से इन सबको एकीकृत कर दिया गया, जिससे ‘एक राष्ट्र, एक कर’ की अवधारणा को मजबूती मिली। इससे न केवल अनुपालन आसान हुआ, बल्कि छोटे और मध्यम व्यापारियों को भी राहत मिली।
जीएसटी के आने के बाद से औपचारिक करदाताओं की संख्या 66 लाख से बढ़कर 1.4 करोड़ हो गई है। इसका सीधा प्रभाव भारत की औपचारिक अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन पर पड़ा है। मासिक जीएसटी संग्रह लगातार ₹1.6 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर रहा है, जो भारत की आर्थिक मजबूती और कर संग्रहण की दक्षता को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप जीएसटी परिषद ने समय-समय पर आम जनता को राहत देने के लिए कर दरों को युक्तिसंगत बनाया है। साबुन, हेयर ऑयल जैसे घरेलू उत्पादों पर टैक्स 28% से घटाकर 18%, सैनिटरी नैपकिन को शून्य कर श्रेणी में लाना, और ₹7,500 तक के होटल रूम्स पर कर दर को 28% से घटाकर 18% करना आम परिवारों के बजट को राहत देने वाले कदम हैं।
इसके अतिरिक्त, दवाएं, डेयरी उत्पाद, ताजे फल-सब्जियां और कृषि उपकरणों पर कम कर दरें किसानों और मध्यमवर्गीय परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान कर रही हैं।
छत्तीसगढ़ जैसे औद्योगिक राज्य के लिए जीएसटी सुधार वरदान साबित हो रहे हैं। राज्य के 60,000 से अधिक एमएसएमई को अनुपालन में आसानी और इनपुट टैक्स क्रेडिट से सीधी राहत मिली है। कोयला, इस्पात और सीमेंट जैसे प्रमुख क्षेत्रों में कर दरों में कटौती से नकदी प्रवाह में सुधार हुआ है और निवेश को प्रोत्साहन मिला है। साथ ही, वन उत्पादों जैसे बीड़ी और तेंदू पत्ता क्षेत्र को पारंपरिक आजीविका के संरक्षण हेतु विशेष रियायतें दी गई हैं।
ई-वे बिल प्रणाली और डिजिटल बिलिंग जैसे नवाचारों ने भारत की कर प्रणाली को डिजिटल और पारदर्शी बना दिया है। औसतन हर महीने 9 करोड़ से अधिक ई-वे बिल बन रहे हैं, जिससे ईमानदारी और पारदर्शिता को बढ़ावा मिला है। यह भारत को वैश्विक व्यापार भागीदारों के बीच विश्वसनीयता दिलाने में सहायक है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘विकसित भारत’ विजन केवल नीतियों का संकलन नहीं है, यह हर नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव का प्रयास है। जीएसटी केवल कर नहीं, विश्वास, समावेश और समृद्धि का प्रतीक बन चुका है। आज जब भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है, तब यह आर्थिक सुधार हर घर की दिवाली को और रोशन कर रहा है।
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