PoK Protest : पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में चल रहा विरोध प्रदर्शन अब एक व्यापक और अत्यंत गंभीर जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। सोमवार को यह आंदोलन लगातार 14वें दिन भी जारी रहा, लेकिन इस बार इसमें एक भावनात्मक और प्रभावशाली मोड़ देखने को मिला। रावलकोट के ईदगाह मैदान में पिछले 11 दिनों से 70,000 से अधिक लोग डटे हुए हैं। इस बार प्रदर्शन में केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि 10 से 12 साल के स्कूली बच्चे और बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं। हाथों में पोस्टर और बैनर थामे ये बच्चे “पाकिस्तानी सेना बाहर जाओ” और “हमें बुनियादी अधिकार चाहिए” जैसे नारे लगा रहे हैं, जो क्षेत्र में व्याप्त दमनकारी नीतियों के विरुद्ध जनता के गहरे आक्रोश को दर्शाते हैं।

महिलाओं और बच्चों का बढ़ता आक्रोश
विरोध प्रदर्शन केवल रावलकोट तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब यह क्षेत्र के सुदूर शहरों और गांवों में भी तेजी से फैल रहा है। सुधनोती जिले के तरार खेल में स्कूली बच्चों ने सड़कों पर उतरकर आजादी की मांग की है, जबकि मंडहोल में सैकड़ों महिलाओं ने मार्च निकालकर पाकिस्तानी सरकार और सेना को ‘कब्जा करने वाला’ करार दिया है। यह दृश्य PoK में पाकिस्तानी शासन के प्रति बढ़ती नफरत और आजादी की ललक को विश्व पटल पर उजागर कर रहा है। इंटरनेट बंदी और संचार साधनों के अभाव के बावजूद, लोगों का सड़कों पर निकलना सरकार की दमनकारी नीतियों की विफलता को साबित करता है।

मिलिट्री सिस्टम को खदेड़ने की सीधी चेतावनी
आंदोलन के मुख्य आयोजक सरदार अमन खान ने ईदगाह मैदान में हजारों समर्थकों को संबोधित करते हुए पाकिस्तानी अधिकारियों को दो टूक चेतावनी दी है। खान ने बांग्लादेश, बलूचिस्तान और पश्तून क्षेत्रों में सेना के अत्याचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि कश्मीरी जनता का दमन बंद नहीं हुआ, तो पाकिस्तानी सेना को PoK से पूरी तरह खदेड़ दिया जाएगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब PoK के लोगों के पास भी कई विकल्प खुले हैं और वे अब और अधिक दमन सहन करने को तैयार नहीं हैं।
अवामी एक्शन कमिटी की 23 जून की बड़ी डेडलाइन
विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही ‘अवामी एक्शन कमिटी’ (AAC) ने पाकिस्तानी सरकार के सामने 38 मांगों का एक चार्टर रखा है। कमिटी ने सरकार को 23 जून तक का अल्टीमेटम दिया है। यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो AAC ने रावलकोट से मुजफ्फराबाद तक 1 लाख लोगों के साथ विशाल मार्च निकालने का ऐलान किया है। नेताओं का दावा है कि इस मार्च का उद्देश्य मुजफ्फराबाद की प्रशासनिक सत्ता पर जनता का नियंत्रण स्थापित करना है। उन्होंने इसे नेपाल और बांग्लादेश की क्रांतियों की तरह एक ऐतिहासिक बदलाव बताया है।
मानवीय संकट के बीच गंभीर होता जा रहा है गतिरोध
5 जून से इंटरनेट बंद होने और 14 जून से खाद्य आपूर्ति रोकने के कारण PoK में मानवीय स्थिति अत्यंत चिंताजनक हो गई है। आवश्यक वस्तुओं की किल्लत और सुरक्षा बलों के साथ हुई झड़पों में अब तक 58 लोगों की मौत हो चुकी है। इंटरनेट बंदी ने स्थानीय लोगों का बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह काट दिया है, जिससे सूचनाओं का आदान-प्रदान बाधित है। 23 जून की समय-सीमा नजदीक आते ही प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव अपने चरम पर है, जिससे क्षेत्र में किसी बड़े राजनीतिक उलटफेर की संभावना बनी हुई है।










