Poland News : यूरोपीय देश पोलैंड में राजनीतिक और संवैधानिक संकट लगातार गहराता जा रहा है। प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की सरकार और राष्ट्रपति कारोल नावरोकी के बीच जारी सत्ता संघर्ष ने शुक्रवार रात नया मोड़ ले लिया। राजधानी वारसॉ स्थित संवैधानिक ट्रिब्यूनल के मुख्यालय के बाहर भारी पुलिस बल और सशस्त्र सुरक्षा इकाइयों की तैनाती की गई। इस घटनाक्रम के बाद देश की राजनीति में हलचल मच गई। हालात की गंभीरता को देखते हुए सेनेगल की आधिकारिक यात्रा पर जा रहे राष्ट्रपति नावरोकी ने अपना विमान बीच रास्ते से ही वारसॉ वापस मोड़ दिया।

G20 बैठक में विदेश मंत्री ने सरकार की कार्रवाई का किया बचाव
अमेरिका के अटलांटा में आयोजित G20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की ने सरकार के कदम का बचाव किया। समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में उन्होंने कहा कि पिछली व्यवस्था के तहत नियुक्त राष्ट्रपति और अदालत का पुराना नेतृत्व निर्वाचित बहुमत वाली सरकार के कामकाज में बाधा डाल रहा था।

सिकोरस्की के मुताबिक, सरकार के फैसलों, कानूनों की व्याख्या और बजट को मंजूरी देने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी। उन्होंने दावा किया कि संवैधानिक ट्रिब्यूनल को दोबारा प्रभावी ढंग से काम करने योग्य बनाने के लिए सख्त कदम उठाना जरूरी हो गया था।
जजों के निलंबन से शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत संवैधानिक ट्रिब्यूनल की जज अन्ना कोरविन-पियोत्रोव्स्का के उस आदेश से हुई, जिसमें उन्होंने अदालत के अध्यक्ष बोगदान श्वेचकोव्स्की और उनके डिप्टी बार्टोमिएज सोहांस्की को एक महीने के लिए निलंबित कर दिया। इसके बाद उन्होंने अस्थायी रूप से अदालत का नियंत्रण संभाल लिया।
पोलिश समाचार एजेंसी PAP के अनुसार, दोनों वरिष्ठ जजों पर कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही और संसद द्वारा नियुक्त जजों को न्यायिक कार्यवाही में शामिल होने से रोकने के आरोप लगाए गए हैं। निलंबन के बाद दोनों अधिकारियों के प्रोफाइल ट्रिब्यूनल की वेबसाइट से हटा दिए गए।

ट्रिब्यूनल ने कार्रवाई को बताया तख्तापलट
जजों के निलंबन के बाद संवैधानिक ट्रिब्यूनल ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर वेबसाइट पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया। अदालत ने कहा कि पियोत्रोव्स्का को ट्रिब्यूनल की ओर से बयान देने का अधिकार नहीं है। ऐसा करने वाले लोगों की कार्रवाई को अदालत ने तख्तापलट जैसा बताया। इसी विवाद के बीच जज की मांग पर अदालत परिसर के बाहर पुलिस बल तैनात किया गया।
राष्ट्रपति ने बीच रास्ते से विमान वारसॉ लौटाया
घटनाक्रम की जानकारी मिलने के बाद राष्ट्रपति कारोल नावरोकी ने सेनेगल की यात्रा रोक दी। उनका विमान दक्षिणी स्पेन के ऊपर उड़ान भर रहा था, तभी उन्होंने उसे वापस पोलैंड ले जाने का निर्देश दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में राष्ट्रपति का देश में मौजूद रहना जरूरी है।
राष्ट्रपति के कार्यालय के अनुसार, वारसॉ पहुंचने के बाद नावरोकी सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष के साथ आपात बैठक करेंगे। इसमें जजों के निलंबन और ट्रिब्यूनल की घेराबंदी से जुड़े घटनाक्रम की समीक्षा की जाएगी।
राजदूत का इस्तीफा, विपक्ष ने टस्क सरकार को घेरा
इस राजनीतिक संकट का असर कूटनीतिक स्तर पर भी दिखाई दिया। चीन में पोलैंड के राजदूत याकुब कुमोच ने शुक्रवार शाम इस्तीफा दे दिया। उन्होंने मौजूदा राष्ट्रीय परिस्थितियों को पद छोड़ने की वजह बताया।
प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा कि वर्षों से चली आ रही कथित गैर-कानूनी व्यवस्था के बाद कानून का शासन बहाल करना सरकार की जिम्मेदारी है। वहीं, विपक्षी पार्टी PiS के प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री यारोस्लाव काचिनस्की ने सरकार पर तानाशाही की ओर बढ़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पोलैंड पुलिस स्टेट बनता जा रहा है और संवैधानिक ट्रिब्यूनल की स्वतंत्रता को कुचला जा रहा है।
पोलैंड की राजनीति पर दुनिया की नजर
पोलैंड में अब विवाद केवल जजों के निलंबन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निर्वाचित सरकार के अधिकार और राष्ट्रपति की भूमिका पर बड़ा सवाल बन गया है। आने वाले दिनों में अदालतों और राजनीतिक नेतृत्व के फैसले देश के संवैधानिक भविष्य की दिशा तय कर सकते हैं।
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