Police Brutality Chhattisgarh :छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से पुलिस की बर्बरता का एक शर्मनाक मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि इंसाफ की तलाश में दर-दर भटकते आम नागरिकों की बेबसी को भी उजागर किया है। आरोप है कि एक पीड़ित परिवार जब थाने में तोड़फोड़ की शिकायत दर्ज कराने पहुंचा, तो उल्टा उन्हीं के साथ मारपीट और गाली-गलौज की गई।

थाने में शिकायत करने पहुंचे, पुलिस ने कर दी पिटाई
घटना 9 अक्टूबर की रात की बताई जा रही है। पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने अपने घर में हुई तोड़फोड़ की शिकायत दर्ज कराने के लिए नजदीकी थाने का रुख किया। थाने में ड्यूटी पर तैनात सब-इंस्पेक्टर (SI) और अन्य पुलिसकर्मियों ने शिकायत लेने के बजाय परिवार के साथ बदसलूकी शुरू कर दी। मामला बढ़ा तो पुलिस ने कथित तौर पर मारपीट तक कर दी।

SP से मिलने पर शुरू हुई धक्का-मुक्की
परिवार के अनुसार जब उन्होंने पुलिस की इस रवैये को लेकर पुलिस अधीक्षक (SP) से मिलने की बात कही, तो स्थिति और बिगड़ गई। पुलिसकर्मियों ने न सिर्फ उन्हें SP से मिलने से रोका, बल्कि धक्का-मुक्की भी की गई। पीड़ितों का कहना है कि थाने के भीतर उनके साथ जो व्यवहार हुआ, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए बेहद शर्मनाक है।
SP बंगले के बाहर रातभर धरना
न्याय की उम्मीद में पीड़ित परिवार रातभर पुलिस अधीक्षक विजय पांडेय के सरकारी निवास के बाहर धरने पर बैठा रहा। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट मांग की कि दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई हो। परिवार का यह भी कहना है कि उनके पास थाने के बाहर और आसपास की CCTV फुटेज है, जिससे पूरा घटनाक्रम साफ हो जाएगा।
उल्टा पीड़ित पर ही दर्ज कर दी गई FIR
घटना की सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय पीड़ित परिवार के बड़े भाई पर ही “शासकीय कार्य में बाधा डालने” का केस दर्ज कर दिया। इससे पीड़ित परिवार में नाराजगी और भय का माहौल है। परिवार ने इसे न्याय का मजाक बताया है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
SP ने दिए जांच के आदेश
घटना के बाद पुलिस अधीक्षक विजय पांडेय ने पूरे मामले की जांच के निर्देश दे दिए हैं। उन्होंने बयान दिया कि, “जो भी पुलिसकर्मी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होगी।” हालांकि, पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है और वे न्याय की आस में SP कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
न्याय के लिए संघर्ष जारी
पीड़ित परिवार का कहना है कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, वे पीछे नहीं हटेंगे। परिवार के सदस्यों ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्हें डर है कि मामले को दबाने की कोशिश की जा सकती है, इसलिए उन्होंने CCTV फुटेज को भी सुरक्षित रखा है।यह घटना न केवल छत्तीसगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी बताती है कि आज भी आम जनता को न्याय पाने के लिए सिस्टम से लड़ना पड़ता है। सवाल यह है कि जब थाने में ही फरियादी सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता न्याय के लिए कहां जाए?










