Police station wedding
Police station wedding: छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले से मानवता और पुलिस के सेवा भाव की एक ऐसी अनूठी तस्वीर सामने आई है, जिसने समाज के सामने एक नई मिसाल पेश की है। अक्सर पुलिस थानों को अपराध और विवाद सुलझाने के केंद्र के रूप में देखा जाता है, लेकिन बुधवार को मरवाही थाना परिसर एक पवित्र बंधन का साक्षी बना। यहाँ न तो कोई मुजरिम था और न ही कोई शिकायत, बल्कि चारों ओर खुशियों का माहौल था। थाना प्रभारी की संवेदनशीलता के कारण थाने के भीतर ही शहनाई गूंजी और एक प्रेमी जोड़े ने सात फेरे लेकर अपनी नई जिंदगी की शुरुआत की।
यह भावुक कर देने वाली कहानी मरवाही क्षेत्र के धूम्माटोला बहरीझोरकी के रहने वाले संजय सिंह और पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले की निवासी मीरा सिंह की है। संजय और मीरा काफी समय से एक-दूसरे के प्यार में थे। उनका रिश्ता केवल भावनात्मक नहीं था, बल्कि वे इसे विवाह के अंजाम तक पहुँचाना चाहते थे। हालांकि, जैसा कि अक्सर देखा जाता है, उनके इस प्रेम के बीच सामाजिक और पारिवारिक दीवारें खड़ी हो गई थीं। परिजनों की असहमति के कारण दोनों का साथ रहना मुश्किल होता जा रहा था।
जब परिजनों का विरोध बढ़ने लगा और दोनों को अपने भविष्य को लेकर असुरक्षा महसूस होने लगी, तो उन्होंने कानून का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया। वे अपनी गुहार लेकर मरवाही थाना पहुँचे। उन्होंने पुलिस को अपनी स्थिति बताई और सुरक्षा की मांग की। मरवाही थाना प्रभारी शनिप रात्रे ने इस मामले को किसी साधारण फाइल की तरह नहीं देखा, बल्कि उन्होंने इसे एक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में लिया। उन्होंने जोड़े की बातों को ध्यान से सुना और तुरंत समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए।
किसी भी कदम को उठाने से पहले थाना प्रभारी ने कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखा। सबसे पहले पुलिस ने संजय और मीरा के दस्तावेजों की जांच की ताकि उनकी आयु की पुष्टि की जा सके। जांच में दोनों बालिग पाए गए, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि उन्हें अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का कानूनी अधिकार है। इसके बाद थाना प्रभारी ने दोनों पक्षों के परिजनों को थाने बुलाया। उन्होंने परिजनों को कानून का हवाला देते हुए समझाया कि दो वयस्कों के फैसलों का सम्मान करना न केवल कानूनी रूप से अनिवार्य है, बल्कि सामाजिक समरसता के लिए भी जरूरी है।
पुलिस की प्रभावी समझाइश और थाना प्रभारी के सकारात्मक दृष्टिकोण का असर यह हुआ कि जो परिवार कल तक शादी के खिलाफ थे, वे आज अपने बच्चों की खुशी के लिए राजी हो गए। पुलिस ने न केवल उन्हें मनाया, बल्कि थाना परिसर में ही शादी की सारी तैयारियां करवाईं। पुलिसकर्मियों ने बड़े भाई और अभिभावक की भूमिका निभाते हुए रस्में पूरी करवाईं। यह नजारा देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो गया। अब संजय और मीरा एक आधिकारिक और सामाजिक रूप से स्वीकृत जोड़े के रूप में अपनी नई यात्रा शुरू कर चुके हैं।यह घटना साबित करती है कि यदि खाकी वर्दी के पीछे एक संवेदनशील दिल हो, तो कानून के रक्षक समाज में बड़े बदलाव ला सकते हैं। मरवाही पुलिस की इस पहल की पूरे छत्तीसगढ़ में प्रशंसा हो रही है।
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