Political Family Feud: बिहार में लालू यादव के परिवार में पिछले कुछ वर्षों से गहरे राजनीतिक संघर्ष चल रहे हैं। तेजप्रताप यादव, जो कि लालू यादव के बड़े बेटे हैं, उन्हें पहले ही पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। अब, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राजद (RJD) की करारी हार के बाद लालू यादव की बेटी, रोहिणी आचार्य ने भी पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया है। यह घटना सिर्फ लालू यादव परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसे पारिवारिक संघर्ष और टूट की घटनाएं सामने आती रही हैं, जो राजनीति में परिवारों के भीतर संघर्ष को उजागर करती हैं।
Political Family Feud: मुलायम सिंह यादव परिवार
उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े राजनीतिक घरानों में से एक मुलायम सिंह यादव परिवार में कई बार पारिवारिक विवाद खुलकर सामने आए हैं। 2016 में अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव के बीच घमासान संघर्ष देखने को मिला। इस संघर्ष के दौरान, पिता मुलायम सिंह ने कई बार सुलह कराने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी और अंततः शिवपाल यादव ने अपनी अलग पार्टी, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (PSP) बना ली। हालांकि, मुलायम सिंह के निधन के बाद, अखिलेश यादव ने शिवपाल को मनाया और अंततः शिवपाल यादव ने अपनी पार्टी का विलय समाजवादी पार्टी में कर दिया।
इस परिवार की एक और कड़वी सच्चाई तब सामने आई, जब मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू, अपर्णा यादव, ने 2022 में समाजवादी पार्टी छोड़कर बीजेपी जॉइन कर ली थी। अपर्णा का अखिलेश से हमेशा ही मतभेद रहा और यह साफ था कि वह बीजेपी के करीब थीं। उन्होंने पहले भी पीएम मोदी की तारीफ की थी, जो इस पूरे घटनाक्रम को और भी दिलचस्प बना देता है।
Political Family Feud: ओपी चौटाला परिवार
हरियाणा के चौटाला परिवार की राजनीति भी एक लंबे समय से फूट का शिकार रही है। INLD से टूटकर अजय चौटाला और उनके बेटों ने जननायक जनता पार्टी (JJP) बनाई। इसके बाद, अजय चौटाला के बेटे दुष्यंत चौटाला डिप्टी सीएम बने। वहीं, उनके बड़े भाई ओपी चौटाला INLD को जिंदा रखने की कोशिश करते रहे। 2018 में इस परिवार में अंदरूनी खींचतान और विरासत की लड़ाई शुरू हुई, जिसके परिणामस्वरूप अजय चौटाला और उनके परिवार ने INLD से अलग होकर JJP का गठन किया।
JJP ने 2019 के विधानसभा चुनाव में 90 में से 10 सीटें जीतकर राजनीतिक परिदृश्य में अपनी जगह बनाई। इसके बाद, बीजेपी ने JJP के साथ मिलकर सरकार बनाई और दुष्यंत चौटाला को डिप्टी सीएम बना दिया। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले BJP और JJP का गठबंधन टूट गया, जिससे दुष्यंत चौटाला को भी डिप्टी सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा।
शरद पवार परिवार
महाराष्ट्र में शरद पवार के परिवार में 2023 में एक बड़ा राजनीतिक संकट आया, जब उनके भतीजे अजित पवार ने NCP तोड़कर भाजपा-शिंदे सरकार में उपमुख्यमंत्री का पद ग्रहण किया। शरद पवार अब अपनी पार्टी को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। दरअसल, शरद पवार अपनी बेटी सुप्रिया सुले को पार्टी का नेतृत्व सौंपना चाहते थे, लेकिन अजित पवार इस बदलाव के खिलाफ थे। इसके परिणामस्वरूप, अजित पवार ने अपनी राह अलग की और भाजपा के साथ गठबंधन किया।
गांधी परिवार
गांधी परिवार में भी एक समय राजनीतिक दरार देखने को मिली, जब संजय गांधी के निधन के बाद उनकी पत्नी मेनका गांधी ने कांग्रेस से अलग होकर भा.ज.पा जॉइन कर लिया। मेनका गांधी और उनके बेटे वरुण गांधी ने बीजेपी में अपनी जगह बनाई। हालांकि, 2024 के चुनाव में मेनका गांधी को सुलतानपुर सीट से हार का सामना करना पड़ा। उनके बेटे वरुण गांधी भी बीजेपी के टिकट पर सांसद रह चुके हैं, लेकिन अब वह भी पार्टी से कुछ मतभेदों के कारण चर्चा में हैं।
ठाकरे परिवार
महाराष्ट्र में ठाकरे परिवार भी दो हिस्सों में बंट चुका है। राज ठाकरे ने शिवसेना छोड़कर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) बनाई। इसके बाद, 2022 में एक और बड़ी टूट सामने आई, जब एकनाथ शिंदे ने शिवसेना का बड़ा हिस्सा तोड़कर अपना गुट बना लिया और मुख्यमंत्री बन गए। इस विभाजन के बावजूद, उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी को बचाने की कोशिश की। हालांकि, अब राज और उद्धव के बीच एक बार फिर नजदीकी बढ़ रही है, और दोनों के बीच कुछ समझौते की उम्मीद जताई जा रही है।
करुणानिधि परिवार
तमिलनाडु में DMK के प्रमुख करुणानिधि के बेटों के बीच भी खींचतान रही। जब एमके स्टालिन को पार्टी का वारिस बनाया गया, तो उनके बड़े भाई एमके अलागिरी इस फैसले से खुश नहीं थे। इसके परिणामस्वरूप, अलागिरी को पार्टी से बाहर कर दिया गया। हालांकि, इस पारिवारिक संघर्ष के बावजूद, स्टालिन ने पार्टी की कमान संभाली और अब वह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री हैं।तेलंगाना में KCR की पार्टी के लिए जब चुनावों में हार आई, तब उनके परिवार में भी सबकुछ ठीक नहीं चल रहा था। उनके बेटे केटीआर को पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया था और उन्होंने अपनी बहन के. कविता को पार्टी से बाहर कर दिया था। इसके बाद, कविता ने अपनी अलग पार्टी बनाई। इस संघर्ष ने न केवल परिवार में बल्कि पार्टी के भीतर भी मतभेदों को उजागर किया।
झारखंड का सोरेन परिवार
झारखंड में शिबू सोरेन के परिवार में भी सत्ता और नेतृत्व को लेकर तनाव रहा। उनके बेटे हेमंत सोरेन और बसंत सोरेन के बीच राजनीतिक मतभेद कई बार सामने आए हैं। हालांकि शिबू सोरेन ने हमेशा परिवार को एकजुट रखने की कोशिश की, लेकिन सत्ता की राजनीति में यह तनाव और भी बढ़ गया। इसके अलावा, शिबू सोरेन के दूसरे बेटे दुर्गा सोरेन की मौत के बाद उनकी पत्नी सीता सोरेन बीजेपी में शामिल हो गईं और उन्हें दुमका सीट से लोकसभा चुनाव में उतारा गया, लेकिन वह चुनाव हार गईं।
भारत के कई बड़े राजनीतिक घराने पारिवारिक संघर्षों और टूट से गुजर चुके हैं। चाहे वह लालू परिवार हो, मुलायम सिंह यादव परिवार, ओपी चौटाला का परिवार, या करुणानिधि का परिवार, हर जगह एक आंतरिक राजनीतिक लड़ाई चल रही है। इन संघर्षों से यह स्पष्ट है कि बड़े राजनीतिक परिवारों के भीतर भी सत्ता की चाह और विरासत की लड़ाई एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इन पारिवारिक राजनीति के संघर्षों को न केवल पार्टी और राज्य के भीतर, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्व दिया जा रहा है, और यह राजनीति की दिशा को प्रभावित करने के साथ-साथ नई राजनीतिक गठबंधनों और समीकरणों को भी जन्म देता है।