Vice President Election : उपराष्ट्रपति चुनाव के नतीजों के बाद विपक्षी दलों में हलचल तेज हो गई है। चुनाव में क्रॉस-वोटिंग के आरोपों ने देश की सियासत में नया विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. के प्रत्याशी सुदर्शन रेड्डी की हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि विपक्षी सांसदों को ₹15-20 करोड़ की घूस देकर खरीदा गया।
TMC सांसद और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे ने कहा:”मुझे जानकारी मिली है कि बीजेपी ने विपक्ष के सांसदों को खरीदने के लिए प्रति सांसद ₹15-20 करोड़ खर्च किए हैं। ये लोकतंत्र की हत्या है।” वहीं, पार्टी ने चुनाव आयोग से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
भाजपा ने TMC के आरोपों को नकारते हुए कहा कि विपक्ष के अंदर ही फूट और अविश्वास है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा: “हम I.N.D.I.A. गठबंधन के उन सांसदों को धन्यवाद देते हैं जिन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर वोट दिया। यह विपक्षी एकता की असलियत है।”
कुल सांसद: 788
वोटिंग में हिस्सा लेने वाले: 767 (98.2%)
NDA उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन को मिले: 452 वोट
I.N.D.I.A. उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी को मिले: 300 वोट
अमान्य वोट: 15
जीत का अंतर: 152 वोट
विश्लेषण के अनुसार, NDA के पास 427 सांसद हैं। वाईएसआर कांग्रेस के 11 सांसदों ने खुलकर समर्थन दिया। यानी NDA के कुल समर्थक हुए 438। फिर भी राधाकृष्णन को 452 वोट मिले, जो यह संकेत देता है कि कम से कम 14 विपक्षी सांसदों ने क्रॉस-वोटिंग की।
मनीष तिवारी (कांग्रेस): “अगर क्रॉस-वोटिंग हुई है, तो I.N.D.I.A. गठबंधन को इसकी गहराई से जांच करनी चाहिए। यह गंभीर मामला है।”
तेजस्वी यादव (RJD): “RJD के सभी 9 सांसदों ने सुदर्शन रेड्डी को वोट दिया। हमारे यहां कोई क्रॉस-वोटिंग नहीं हुई।”
सुप्रिया सुले (NCP): “अगर मतदान गुप्त था तो बीजेपी को कैसे पता चला कि किसने किसे वोट दिया?”
अरविंद सावंत (शिवसेना – उद्धव गुट): “जो सांसद अमान्य वोट डालते हैं, क्या वे पढ़े-लिखे नहीं हैं? क्या उन्होंने ‘अंतरात्मा’ से वोट दिया या पैसा लिया? BJP ने ब्लैकमेल कर वोट हासिल किए हैं।”
भाजपा का कहना है कि विपक्षी सांसदों ने NDA प्रत्याशी को स्वेच्छा से समर्थन दिया है। पार्टी नेताओं का दावा है कि कम से कम 15 विपक्षी सांसदों ने NDA को वोट दिया, जबकि कुछ ने जानबूझकर वोट अमान्य किए।
उपराष्ट्रपति चुनाव के बाद आए नतीजों ने न सिर्फ विपक्ष की एकता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि संसद में विश्वास और राजनीतिक ईमानदारी को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर BJP इस नतीजे को “अंतरात्मा की जीत” बता रही है, वहीं विपक्ष इसे धनबल और दबाव की राजनीति का परिणाम मान रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से सड़क तक गर्म रहने वाला है।
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