Pravin Gaikwad Protest : महाराष्ट्र के अक्कलकोट में शिवधर्म फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं और संभाजी ब्रिगेड के बीच तीखी टकराव की ताजा घटना सामने आई है। विवाद की जड़ संभाजी ब्रिगेड द्वारा “संभाजी” एकवचन को अपनाना बताई जा रही है, जिसका शिवधर्म फाउंडेशन विरोध कर रहा है। फाउंडेशन का कहना है कि छत्रपति संभाजी महाराज के नाम से इस तरह का किसी संगठन द्वारा एकवचन रूप में सीमित उपयोग गलत संदेश देता है। शिवधर्म फाउंडेशन ने पहले ही चेतावनी दे दी थी कि संभाजी ब्रिगेड तुरंत अपना नाम बदलकर “संभाजी महाराज ब्रिगेड” करे अन्यथा उसे सार्वजनिक जगहों पर आंदोलन व विरोध का सामना करना पड़ेगा। इसी अनुरोध को अनसुना किए जाने के फैसले के बाद अक्कलकोट में यह विवाद उभर कर सामने आया।
सम्भाजी ब्रिगेड के महाराष्ट्र अध्यक्ष प्रवीण गायकवाड अक्कलकोट में आयोजित फत्तेसिंह शिक्षण संस्था और सकल मराठा समाज के कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे, तभी शिवधर्म फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं और शिवभक्तों ने उनका घेराव किया और प्रदर्शन शुरू कर दिया। गायकवाड के चेहरे पर बिना किसी पूर्व चेतावनी के चिकित्सकीय उद्देश्य से नहीं बल्कि सार्वजनिक अपमानित करने के लिए कालिख पोती गई।
कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के बाद विरोधियों ने प्रवीण गायकवाड को गाली-गलौज करते हुए प्रताडित करना शुरू किया। आरोप है कि गायकवाड ने स्वामी समर्थ के प्रति अपमानजनक टिप्पणी भी की थी, जिसे शिवधर्म फाउंडेशन ने व्यक्तिगत और धार्मिक भावनाओं का अपमान बताया। इससे पहले भी शिवधर्म फाउंडेशन द्वारा संभाजी ब्रिगेड के नामकरण पर भूख हड़ताल की जा चुकी है। नेताओं का कहना है कि यदि ब्रिगेड ने नाम बदलकर नहीं ये प्रतिबद्धता नहीं दी तो देश भर में उसे “सड़क पर चलने” और “सामाजिक समर्थन” से वंचित किया जाएगा।
कालिख पोतने के बाद गायकवाड ने तुरंत अपनी गाड़ी में बैठकर वहां से वापस निकलने की कोशिश की। लेकिन कार्यकर्ता पीछे-पीछे दौड़े और कार का पीछा करते हुए गायकवाड को कार से भी वहां से खींचकर जमकर पीटा। जानकारी के मुताबिक कार्यकर्ता सड़क पर उन्हें घेरकर मारपीट करते रहे, लेकिन किसी ने पुलिस को तुरंत सूचना नहीं दी। घटना के बाद गायकवाड की कोई प्रतिक्रिया अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई।
इस बीच, पुणे, सातारा, कोल्हापुर, सांगली, सोलापुर जैसे जिलों में शिवधर्म फाउंडेशन की ओर से “संघर्ष मोर्चे” निकाले गए। इसमें स्थानीय शिव भक्तों ने संभाजी ब्रिगेड का विरोध करते हुए चेतावनी जारी की, कि यदि संगठन नाम नहीं बदलेगा तो ‘धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं’ का उल्लंघन स्वीकार्य नहीं होगा।
शिवधर्म फाउंडेशन का आरोप है कि संभाजी ब्रिगेड हिंदू आचार-विधि और रीति-रिवाजों का मखौल उड़ाती है। उनका कहना है कि संगठन अक्सर प्रचंड ऐतिहासिक वैकल्पिक धर्म और प्रभावित तथ्यों को प्रचारित करता है, जो हिंदू मान्यताओं और मराठी-मराठा धरोहर के सीधे विरोध में पूर्वाग्रहपूर्ण तरीके से प्रस्तुत होता है।
अक्कलकोट में हुई इस घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस की प्रतिक्रिया व उदासीन रही है। जबकि धार्मिक नेतृत्व और राजनीतिक दल धर्म-संस्कृति विवाद को राजनैतिक आरोप-प्रत्यारोप के तौर पर उपयोग कर रहे हैं। कहा जा रह है कि शिवधर्म फाउंडेशन के नेताओं ने महाराष्ट्र सरकार से भी सुरक्षा आश्वासन मांगा है।
जहां एक ओर शिवधर्म फाउंडेशन ने कड़ा रुख अपनाया है, वहीं दूसरी ओर प्रवीण गायकवाड की मौन प्रतिक्रिया ने सबको हैरान कर दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि गायकवाड सोशल मीडिया या प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपना पक्ष कब तक स्पष्ट करेंगे और क्या वे कानूनी कार्रवाई की ओर कदम बढ़ाएंगे।
अक्कलकोट में हुई यह घटना अब महाराष्ट्र में धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के गहन मुद्दों को उजागर कर रही है। जहां एक ओर नामकरण विवाद धार्मिक राजनीति से टकरा रहा है, वहीं दूसरी ओर सामूहिक प्रदर्शन, सार्वजनिक अपमान और सड़क पर मारपीट जैसी हरकतों ने संवैधानिक और सामाजिक उत्तरदायित्वों पर सवाल खड़े किए हैं। अब देखना यह है कि महाराष्ट्र सरकार, पुलिस और दोनों धर्मनिरपेक्ष संगठन इन चुनौतियों में क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या इस विवाद से धर्म, राजनीति और संस्कृति के अल्पसंख्यक–बहुसंख्यक समीकरण में कोई बदलाव आएगा।
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