Prayagraj Accident
Prayagraj Accident: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के फाफामऊ क्षेत्र में सोमवार को एक हृदय विदारक हादसा हुआ, जिसने पूरे इलाके को दहला दिया। यहाँ स्थित एक कोल्ड स्टोरेज की विशाल दीवार अचानक भरभराकर गिर गई, जिसकी चपेट में आने से अब तक 9 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। चश्मदीदों के अनुसार, हादसा इतना अचानक और भयानक था कि वहां काम कर रहे मजदूरों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। मलबे के नीचे कई जिंदगियां दब गईं, जिससे घटनास्थल पर अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। बताया जा रहा है कि यह कोल्ड स्टोरेज चांदपुर के एक पूर्व विधायक का है।
शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस भयावह हादसे का मुख्य कारण अमोनिया गैस पाइप का फटना बताया जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि दीवार गिरने से ठीक पहले एक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी थी। पाइप फटने के तुरंत बाद जहरीली अमोनिया गैस का रिसाव शुरू हो गया, जिसने रेस्क्यू ऑपरेशन को और भी चुनौतीपूर्ण बना दिया। गैस के तीखेपन और बदबू के कारण आसपास के ग्रामीण दहशत में आ गए और मौके पर भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। गैस रिसाव ने मलबे में दबे घायल मजदूरों के लिए सांस लेना भी दूभर कर दिया।
हादसे के समय की स्थिति बयां करते हुए एक जीवित बचे मजदूर ने बताया कि उस वक्त दोपहर के भोजन (लंच) का समय था। ज्यादातर मजदूर खाना खाकर सुस्ता रहे थे या वहीं आराम कर रहे थे, तभी अचानक पूरी बिल्डिंग ताश के पत्तों की तरह ढह गई। अनुमान है कि उस वक्त अंदर करीब 20 से अधिक मजदूर काम कर रहे थे। जो लोग अंदर गहरे हिस्से में थे, वे बाहर की ओर भाग ही नहीं पाए। मलबे का ढेर इतना विशाल था कि कई लोग उसमें पूरी तरह समा गए।
हादसे के बाद जब प्रशासनिक टीम और एंबुलेंस देरी से पहुंची, तो स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। अपनों को खोने और मदद में देरी से नाराज भीड़ ने मौके पर मौजूद एंबुलेंस पर पथराव कर दिया। इस दौरान पुलिस कर्मियों और ग्रामीणों के बीच तीखी नोक-झोंक और झड़प भी देखने को मिली। स्थिति को बिगड़ता देख भारी पुलिस बल तैनात किया गया। प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार और जिलाधिकारी (DM) मनीष वर्मा खुद मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन की कमान संभाली।
वर्तमान में घटनास्थल पर एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें तैनात हैं और मलबे को हटाने के लिए कई जेसीबी मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। अमोनिया गैस की भारी गंध के कारण बचाव कर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है; लोग अपने मुंह पर गमछा और रुमाल बांधकर काम कर रहे हैं। अब तक 9 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि कई घायलों को इलाज के लिए स्वरूप रानी अस्पताल (SRN) भेजा गया है। डॉक्टरों के मुताबिक, घायलों में से कई की स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है।
प्रशासन ने इस पूरे मामले की गहन जांच के आदेश दिए हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि क्या कोल्ड स्टोरेज के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया था या फिर गैस पाइपलाइन के रखरखाव में लापरवाही बरती गई थी। पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट किया है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्रशासन की पहली प्राथमिकता मलबे में दबे संभावित जीवित लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।
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