Pregnant Wife Murder: चरित्र पर संदेह के चलते अपनी आठ माह की गर्भवती पत्नी की निर्मम हत्या करने वाले पति को षष्ठम अपर सत्र न्यायाधीश जनक कुमार हिड़को की अदालत ने कड़ा दंड सुनाया है। अदालत ने आरोपी अनिल सिंह शांडिल्य को न केवल पत्नी की हत्या का दोषी पाया, बल्कि साक्ष्य नष्ट करने और अजन्मे भ्रूण के जीवन को समाप्त करने के प्रयास जैसे जघन्य अपराधों के लिए भी कठोर सजा दी है। इस फैसले ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि न्यायपालिका उन अपराधों को गंभीरता से लेती है जिनमें एक साथ एक महिला और उसके अजन्मे शिशु दोनों की जान ली जाती है।
यह निर्णय समाज में महिलाओं और अजन्मे बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और ऐसी क्रूर मानसिकता रखने वालों के लिए एक मिसाल कायम करता है। यह मामला उन पतियों के लिए एक चेतावनी है जो संदेह और अविश्वास के आधार पर हिंसा का सहारा लेते हैं।
यह सनसनीखेज वारदात दरिमा थाना क्षेत्र के जयपुर गांव की है। 29 जनवरी 2025 की सुबह गांव के ही लोगों ने अनिला सिंह का शव खेत में संदिग्ध हालत में देखा। शव की सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सभी संदेहों को यकीन में बदल दिया, जिसमें यह पुष्टि हुई कि अनिला की मौत गला दबाकर हत्या के कारण हुई है। पुलिस की जांच का केंद्र बिंदु तत्काल मृतका के पति, अनिल सिंह शांडिल्य, जो ग्राम सकलपुर, थाना भटगांव का निवासी है, की ओर मुड़ गया। मात्र 20 वर्षीय अनिल को हिरासत में लिया गया और गहन पूछताछ के बाद उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया, जिससे मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं।
जांच में यह सामने आया कि घटना की रात अनिल सिंह शांडिल्य ने स्वयं अनिला को फोन कर घर से बाहर बुलाया था। दोनों पास के खेत में मिले, जहाँ वे कुछ समय तक बात करते रहे। इस दौरान अनिला अपने पति के साथ वापस रहने की जिद कर रही थी। इसके विपरीत, आरोपी अनिल सिंह अपनी पत्नी के चरित्र और गर्भ में पल रहे शिशु की पितृत्व को लेकर गंभीर संदेह व्यक्त कर रहा था। यह बातचीत जल्द ही एक हिंसक विवाद में बदल गई।
आवेश में आकर अनिल ने गला दबाकर अनिला की हत्या कर दी और घटनास्थल से फरार हो गया। अपने अपराध के सबूत मिटाने के लिए उसने मृतका का मोबाइल फोन भी तोड़कर नष्ट कर दिया था। पुलिस जांच में यह भी पता चला कि आरोपी हत्या से कुछ दिन पहले ही अपने ससुराल से अपने गांव चला गया था, ताकि वह खुद को घटना से अलग दिखा सके और पुलिस को गुमराह कर सके।
अदालत में विस्तृत सुनवाई हुई, जिसमें अभियोजन पक्ष ने सभी आवश्यक साक्ष्य और गवाह पेश किए। माननीय न्यायाधीश ने प्रस्तुत किए गए सभी तथ्यों और सबूतों के गहन विश्लेषण के बाद, आरोपी अनिल सिंह शांडिल्य को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की तीन महत्वपूर्ण धाराओं के तहत दोषी ठहराया:
धारा 103(1): हत्या के लिए
धारा 91: गर्भस्थ शिशु की हत्या (भ्रूण के जीवन को समाप्त करने का प्रयास) के लिए
धारा 238(क): साक्ष्य छिपाने के लिए
अदालत ने इन धाराओं के लिए क्रमशः आजीवन कारावास, पांच वर्ष का कारावास, और सात वर्ष का कारावास की कठोर सजा सुनाई है। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक धारा के लिए 500-500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। यदि आरोपी अर्थदंड जमा नहीं कर पाता है, तो उसे प्रत्येक खंड के लिए तीन-तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। न्यायाधीश ने स्पष्ट आदेश दिया है कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी, जिसका अर्थ है कि मुख्य सजा आजीवन कारावास के साथ ही अन्य सजाएं भी प्रभावी होंगी। यह फैसला उन सभी पतियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो संदेह के नाम पर अपनी पत्नियों के जीवन को खतरे में डालते हैं।
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