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अंबिकापुर @thetarget365 Price of trust: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने दो महिलाओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए एक सरगुजा भाजपा जिलाध्यक्ष व कांग्रेस के नेता सहित सात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र के गंभीर आरोपों की पुलिस जांच कर एफआईआर दर्ज करने आदेश दिया है। मामला करोड़ों की जमीन के लेन-देन में धोखा देकर दस्तावेजी हेरफेर और आंशिक भुगतान से जुड़ा है।
प्रकरण में अंबिकापुर गांधीनगर निवासी 70 वर्षीय चंद्रमणि देवी कुशवाहा और 75 वर्षीय कलावती कुशवाहा ने सीआरपीसी की धारा 156(3) के अंतर्गत आवेदन दाखिल कर बताया कि वे अनपढ़ और देहाती परिवेश से हैं, और अपने पुश्तैनी ज़मीन के नामांतरण व बंटवारे के लिए स्थानीय अधिवक्ता दिनेश कुमार सिंह से मदद लेने गई थीं। उन्होंने अधिवक्ता पर पूरा भरोसा जताते हुए अपने कागजात सौंपे, पर आरोप है कि इसी भरोसे का फायदा उठाकर अधिवक्ता ने भू-माफिया साथियों के साथ मिलकर साजिशपूर्वक आवेदकाओं की 2.87 हेक्टेयर जमीन के एक के बाद एक कई अनुबंधपत्र व विक्रयपत्र तैयार करवा दिए।
आरोप है कि वर्ष 2015 से 2017 के बीच अलग-अलग तिथियों पर कई बार जमीन का सौदा हुआ — पहले 1.75 करोड़ में अनुबंध, फिर 1.13 करोड़ में नया अनुबंध और अंततः बंटवारे के रूप में केवल 40.16 लाख का आंशिक भुगतान — जबकि ज़मीन आज भी आवेदिकाओं के भाइयों के कब्जे में है। अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों और शिकायतों के आधार पर यह भी कहा गया कि ज़्यादातर भुगतान नकद या अस्पष्ट चेक नंबर से हुआ, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।
इस पूरे प्रकरण में अभियुक्त क्रमांक 1 दिनेश कुमार सिंह अधिवक्ता हैं, जबकि शेष अभियुक्तों में रविकांत सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया, नीरज प्रकाश पांडेय, राजेश सिंह, निलेश सिंह और कांग्रेस नेता राजीव अग्रवाल सभी अंबिकापुर निवासी शामिल हैं। आवेदिकाओं का आरोप है कि ये सभी अभियुक्त राजनीतिक रूप से प्रभावशाली हैं और जमीनों की खरीद-बिक्री कर प्लॉटिंग के ज़रिए मोटा मुनाफा कमाते हैं। मामला भगवानपुर खुर्द की 2.870 हेक्टेयर पैतृक जमीन से जुड़ा है।
प्राथमिक जांच में यह सामने आया कि शिकायतों के बावजूद पुलिस द्वारा अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई थी। अदालत ने इस पर संज्ञान लेते हुए थाना प्रभारी अंबिकापुर को निर्देशित किया है कि शिकायत में वर्णित सभी तथ्यों की जांच कर, उपयुक्त धाराओं में एफआईआर दर्ज की जाए और दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की जाए।
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