Punganur Cow
Punganur Cow: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के गोढ़ीकला और करमीटिकरा गांवों में दुनिया की सबसे छोटी गाय मानी जाने वाली पुंगनूर नस्ल की एक मादा बछिया का जन्म हुआ है। बछिया का जन्म कृत्रिम गर्भाधान (आर्टिफिशियल-इनसेमिनेशन) तकनीक के माध्यम से हुआ। इस दुर्लभ घटना को देखने के लिए गांव में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
Read More : Sukma Encounter: मुठभेड़ में मारे गए 3 नक्सली, इन पर था लाखों का इनाम? जानें कौन थे ये!
पुंगनूर गाय मुख्य रूप से तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में पाई जाती है। यह अपनी बेहद छोटी कद-काठी के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है। इस नस्ल की गाय की ऊंचाई केवल 17 से 24 इंच होती है। इसकी कीमत 2 लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक हो सकती है। पुंगनूर गाय का दूध प्रति लीटर 1000 से 2000 रुपये में बिकता है, जबकि इसका घी 50 हजार रुपये प्रति किलो तक बिकता है।जशपुर जिले के पशुपालक खगेश्वर यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास मौजूद पुंगनूर गायों का वीडियो देखकर इस नस्ल को अपने गांव में लाने का निर्णय लिया। उन्होंने पत्थलगांव पशु चिकित्सालय के अधिकारी केके पटेल से संपर्क किया। अधिकारी ने सीधे गाय खरीदने के बजाय AI तकनीक से ब्रीडिंग का सुझाव दिया।
इसके बाद खगेश्वर यादव ने एक निजी संस्था से पुंगनूर सांड का सीमेन मंगवाया। 29 जनवरी 2025 को गाय में कृत्रिम गर्भाधान कराया गया। लगभग 284 दिनों के गर्भकाल के बाद 11 नवंबर 2025 को गाय ने एक स्वस्थ मादा बछिया को जन्म दिया।बछिया का जन्म होते ही गांव में इसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से आने लगे। यह न केवल ग्रामीणों के लिए बल्कि पशुपालन विशेषज्ञों और कृषि वैज्ञानिकों के लिए भी उत्सुकता का विषय बन गई है।
इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ में आधुनिक और उन्नत पशुपालन तकनीक का प्रमुख उदाहरण माना जा रहा है। ग्रामीणों और पशुपालकों के लिए यह प्रेरणा का स्रोत है कि कैसे नई तकनीक और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर दुर्लभ नस्लों को प्रदेश में लाया जा सकता है।पुंगनूर गाय की उच्च मूल्यवानता और दूध-घी के लिए बाज़ार में मांग को देखते हुए, इस नस्ल को प्रदेश में लाना पशुपालकों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह तकनीक छत्तीसगढ़ में पशुपालन के विकास और आर्थिक सुधार में योगदान दे सकती है।
खगेश्वर यादव ने बताया कि अब वह इस नस्ल की संख्या बढ़ाने और अन्य गांवों तक इसे फैलाने की योजना बना रहे हैं। भविष्य में इस तकनीक का उपयोग करके जशपुर और आसपास के जिलों में उन्नत पशुपालन मॉडल विकसित किया जा सकता है।गांव में पुंगनूर बछिया का जन्म ग्रामीणों में खुशी और उत्साह की लहर लेकर आया है। लोग इसे देखकर पशुपालन में नई संभावनाओं और आधुनिक तकनीक के महत्व को समझ रहे हैं।
Read More : Chhattisgarh Cold Wave: अगले 72 घंटे छत्तीसगढ़ में क्यों हैं सबसे खतरनाक? जानें मौसम का सबसे बड़ा राज़!
Lung Capacity: मानव शरीर की संरचना किसी चमत्कार से कम नहीं है। एक सामान्य इंसान…
Emmanuel Macron: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष और बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच फ्रांस…
Gold-Silver Price: भारतीय सर्राफा बाजार के लिए सप्ताह का पहला दिन, सोमवार 16 मार्च, भारी…
Global Oil Crisis: अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की बढ़ती…
Kerala Assembly Election 2026: भारतीय चुनाव आयोग ने रविवार को देश के पांच राज्यों के…
Share Market News: भारतीय शेयर बाजार के लिए सप्ताह का पहला कारोबारी दिन, सोमवार 16…
This website uses cookies.