Pappu Yadav: बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के लिए न्यायपालिका से एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। लंबे समय से सलाखों के पीछे और कानूनी पेचीदगियों में फंसे पप्पू यादव को उनके खिलाफ चल रहे सभी लंबित मामलों में अदालत से जमानत मिल गई है। इस फैसले के बाद सांसद के समर्थकों और उनके संसदीय क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है। पप्पू यादव शुरू से ही इन कानूनी कार्यवाहियों को सत्ता पक्ष की ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ की साजिश बताते रहे हैं। अब सभी मामलों में बेल मिलने के बाद वे पूरी तरह से स्वतंत्र होकर एक बार फिर जनता के बीच सक्रिय हो सकेंगे, जो उनके राजनीतिक भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

आधी रात का ड्रामा: 6 जनवरी की गिरफ्तारी की पूरी कहानी
सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी का घटनाक्रम किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था। 6 जनवरी की कड़कड़ाती ठंड वाली आधी रात को पटना के मंदिरी स्थित उनके आवास पर भारी पुलिस बल पहुंचा था। गिरफ्तारी के दौरान मौके पर हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जहाँ पप्पू यादव और उनके समर्थकों की पुलिसकर्मियों के साथ तीखी बहस हुई। समर्थक लगातार गिरफ्तारी का वारंट दिखाने की मांग कर रहे थे। रात लगभग 11 बजे सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह खुद मोर्चा संभालने पहुंचे। काफी मशक्कत और हंगामे के बाद पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर आईजीआईएमएस (IGIMS) अस्पताल गई, जहाँ औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था।
31 साल पुराना विवाद: पुनाईचक मकान कब्जे का मामला
पप्पू यादव की इस ताजा गिरफ्तारी के पीछे एक बेहद पुराना मामला है। यह विवाद साल 1995 का है, जब पटना के पुनाईचक इलाके में एक मकान पर कथित तौर पर अवैध कब्जे के आरोप में शास्त्रीनगर टीओपी (जो अब गर्दनीबाग थाने के अंतर्गत है) में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मकान मालिक विनोद बिहारी लाल का आरोप था कि उन्होंने जिसे मकान किराए पर दिया था, उसने बाद में पप्पू यादव के किसी करीबी को वहां रहने की अनुमति दे दी। इसके बाद उस रिहायशी मकान में एक राजनीतिक दल का कार्यालय संचालित होने लगा। यह मामला पिछले 31 वर्षों से एमपी-एमएलए कोर्ट में लंबित था, जिसमें पुलिस वारंट लेकर सांसद की तलाश कर रही थी।
न्यायालय का फैसला: तीन प्रमुख मामलों में मिली राहत
शुक्रवार को हुई सुनवाई सांसद के लिए निर्णायक साबित हुई। अदालत ने पटना के गर्दनीबाग और बुद्धा कॉलोनी थाना क्षेत्रों सहित पूर्णिया में दर्ज कुल तीन मामलों में पप्पू यादव की जमानत याचिका मंजूर कर ली। इन मामलों को लेकर वे न्यायिक हिरासत में थे और कानूनी विशेषज्ञों की टीम लगातार उनकी रिहाई के लिए दलीलें पेश कर रही थी। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अंततः उन्हें राहत प्रदान की। इस न्यायिक आदेश के बाद अब उनके जेल से बाहर आने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। समर्थकों का कहना है कि यह ‘सत्य की जीत’ है और उनके नेता को जानबूझकर परेशान किया जा रहा था।
बेउर जेल से रिहाई की तैयारी: समर्थकों में भारी उत्साह
कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, जमानत मिलने के बाद अब कागजी कार्रवाई और बेल बॉन्ड भरने की औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। जैसे ही अदालत का आदेश बेउर जेल प्रशासन तक पहुंचेगा, पप्पू यादव को रिहा कर दिया जाएगा। इस बीच पटना से लेकर पूर्णिया तक उनके समर्थक जश्न की तैयारी में जुट गए हैं। राजनीतिक गलियारों में भी इस रिहाई को लेकर चर्चाएं तेज हैं, क्योंकि पप्पू यादव की जमीनी सक्रियता अक्सर विरोधियों के लिए चुनौती पेश करती रही है। जहां उनके समर्थक इसे न्याय की जीत बता रहे हैं, वहीं विपक्षी दल इस पर संभलकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। अब देखना होगा कि जेल से बाहर आने के बाद पप्पू यादव की अगली राजनीतिक रणनीति क्या होती है।


















