Purulia Election Boycott
Purulia Election Boycott: पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले से लोकतंत्र की एक चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है। भाजपा सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो के पैतृक क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली पुष्टि ग्राम पंचायत के भुसुड़ी गांव के निवासियों ने आगामी चुनाव के पूर्ण बहिष्कार का निर्णय लिया है। आजादी के दशकों बाद भी बुनियादी सुविधाओं—जैसे पक्की सड़क, स्वच्छ पेयजल और सिंचाई की व्यवस्था—के अभाव में जी रहे ग्रामीणों ने अब ‘नो डेवलपमेंट, नो वोट’ का नारा बुलंद कर दिया है। दीवारों पर लिखी गई बंगाली और अंग्रेजी कविताओं के जरिए ग्रामीण अपनी व्यथा और आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि जिस पुष्टि ग्राम पंचायत के पटराडी गांव में भाजपा सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो का घर है, उसी पंचायत का भुसुड़ी गांव आज भी मध्यकालीन परिस्थितियों में जीने को मजबूर है। बाघमुंडी विधानसभा क्षेत्र के झालदा-1 ब्लॉक में स्थित इस गांव में पक्की सड़क का नामोनिशान तक नहीं है। डामर की सड़क तो दूर, यहां ईंटों की सोलिंग तक नहीं की गई है। इसके अलावा, पेयजल की समस्या इतनी विकराल है कि गर्मियों में कुएं सूख जाते हैं और ट्यूबवेल खराब खुदाई के कारण पानी नहीं दे पाते। सिंचाई की उचित व्यवस्था न होने से किसानों की कमर टूट चुकी है।
भुसुड़ी गांव की दीवारों पर ग्रामीणों ने नीली स्याही से अपनी मांगों और विरोध को उकेरा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में लिखा है—”जहां विकास नहीं, वहां मतदान नहीं।” ग्रामीणों ने अंग्रेजी और बंगाली में कविताएं लिखकर प्रशासन को आईना दिखाया है कि चुनाव आते-जाते रहते हैं, लेकिन उनकी समस्याएं जस की तस बनी रहती हैं। उनकी प्रमुख मांग भुसुड़ी गांव से भजन क्वेरी शॉप तक रेलवे लाइन के समानांतर एक पक्की सड़क और पुल के निर्माण की है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने 2022 से अब तक पंचायत से लेकर ब्लॉक प्रशासन तक कई बार गुहार लगाई, लेकिन नतीजा शून्य रहा।
चुनाव बहिष्कार के इस आह्वान ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। बाघमुंडी के वर्तमान विधायक और तृणमूल उम्मीदवार सुशांत महतो ने इस स्थिति के लिए रेलवे को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि ग्रामीणों की मांग वाली सड़क रेलवे की जमीन पर आती है और राज्य के ‘पथश्री-रास्ताश्री’ प्रोजेक्ट के तहत काम करने के लिए रेलवे ने अनापत्ति नहीं दी। वहीं, भाजपा उम्मीदवार राहिदास कुमार ने इसे राज्य सरकार और स्थानीय ब्लॉक प्रशासन की विफलता बताया है। उन्होंने दुख व्यक्त किया कि विकास न होने के कारण लोग लोकतंत्र के त्योहार से दूरी बना रहे हैं।
ग्रामीणों का सबसे बड़ा आरोप अपने ही सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो पर है। गोपाल सिंह और मलय सिंह मुरा जैसे स्थानीय निवासियों का कहना है कि 2022 में पंचायत और नवंबर 2025 में बीडीओ को लिखित शिकायत देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का तर्क है कि यदि सांसद स्वयं रुचि लेते, तो ब्लॉक प्रशासन पर दबाव बनता और उनकी समस्याएं सुलझ जातीं। इस पूरे विवाद पर पक्ष जानने के लिए जब सांसद महतो को फोन किया गया, तो उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। झालदा-1 के बीडीओ अभिक बनर्जी ने केवल इतना कहा कि मामला उनके संज्ञान में है और वे इसे देख रहे हैं।
भुसुड़ी गांव के लोगों ने साफ कर दिया है कि वे अब झूठे आश्वासनों के झांसे में नहीं आएंगे। उनका कहना है कि पिछले साल धरने और प्रदर्शन के बावजूद प्रशासन की नींद नहीं टूटी। अब जबकि चुनाव नजदीक हैं, तो नेता वोट मांगने आ रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों ने अपने घर की दीवारों को ही अपनी मांग का घोषणापत्र बना दिया है। यह बहिष्कार न केवल स्थानीय प्रशासन की विफलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि जब जनप्रतिनिधि अपने ही क्षेत्र की उपेक्षा करते हैं, तो जनता का लोकतंत्र से भरोसा डगमगाने लगता है।
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