Putin India Visit
Putin India Visit: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत आ रहे हैं। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रपति पुतिन 4-5 दिसंबर को नई दिल्ली में होंगे। इस यात्रा के दौरान, वह 23वें भारत-रूस वार्षिक सम्मेलन में भाग लेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। वैश्विक स्तर पर लगातार बदलते रणनीतिक समीकरणों के बीच, पुतिन का यह दौरा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान को यह स्पष्ट संदेश देगा कि हर परिस्थिति में भारत और रूस एक साथ खड़े हैं। यह साझेदारी मजबूरी की नहीं, बल्कि एक-दूसरे के सम्मान की मजबूत नींव पर खड़ी है।
यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब भारत अमेरिका, फ्रांस और जापान जैसे देशों के साथ रक्षा संबंधों को मजबूत कर रहा है। नई दिल्ली अपने मास्को संबंधों को कितनी तरजीह देती है, यह तेज़ी से ध्रुवीकृत हो रही दुनिया में उसकी संतुलन रणनीति (Balancing Strategy) के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देगा। यह यात्रा दोनों देशों के लिए एक समग्र दृष्टिकोण सामने लाएगी।
दशकों तक भारत अपने सैन्य हथियारों के लिए मास्को पर अत्यधिक निर्भर रहा है, लेकिन अब भारत के हथियार खरीदने के पैटर्न में उल्लेखनीय बदलाव आया है। भारत अब विमानों के दबदबे से हटकर तेजी से एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइलें, नौसेना प्लेटफार्म और बख्तरबंद गाड़ियाँ खरीदने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
पुतिन के इस दौरे पर एयर डिफेंस सिस्टम की डील पर खास नजर रहेगी। अगर S-500 या उससे जुड़े किसी उन्नत एयर-डिफेंस सिस्टम की डील पर कोई भी हलचल होती है, तो यह एक बड़ा संकेत होगा कि रूस अभी भी मिसाइल रक्षा के लिए भारत का पसंदीदा भागीदार बना हुआ है।
भारत अपने आत्मनिर्भरता लक्ष्यों को पूरा करने पर जोर दे रहा है। उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी इस यात्रा के दौरान रूस से टेक्नोलॉजी के ट्रांसफर और मिलकर उत्पादन (Co-production) तथा सह-विकास (Co-Development) पर जोर देंगे। विशेष रूप से मिसाइलों, पनडुब्बियों और विमानन के क्षेत्रों में संयुक्त सहयोग दोनों पक्षों के लिए एक महत्वपूर्ण सौदेबाजी का साधन बना हुआ है। यह स्पष्ट है कि रूस के साथ भारत के संबंध बदल रहे हैं क्योंकि रक्षा संबंध अब किसी एक देश पर निर्भर नहीं हैं और भविष्य में इसमें और विविधता आएगी।
वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए, भारत के लिए यह यात्रा ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। भारत, रूस के साथ तेल और गैस की बिना किसी रुकावट की सप्लाई और दीर्घकालिक कॉन्ट्रैक्ट को सुरक्षित करने पर ध्यान केंद्रित करेगा, ताकि देश की भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
यह तो साफ है कि भारत-रूस के संबंध व्यापक होते जा रहे हैं, और टेक्नोलॉजी के मोर्चे पर सहयोग दोनों पक्षों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। राष्ट्रपति पुतिन की यात्रा इस बात की जाँच (टेस्ट) करेगी कि क्या दोनों देश अपनी दशकों पुरानी साझेदारी को नए भू-राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सफलतापूर्वक ढाल सकते हैं।
Read More : विश्व एड्स दिवस पर सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
Iftaari Attack: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर एक बार फिर गैंगवार और सांप्रदायिक तनाव की आहट…
Pakistan Afghanistan War: मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-इजरायल युद्ध की तपिश के बीच अब दक्षिण…
Strait of Hormuz: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप…
DA Hike: त्रिपुरा की राज्य सरकार ने अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को होली और नए…
Global Warming: हम सभी जानते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण तापमान बढ़ रहा है…
Mosquito Deaths: गर्मियों की आहट के साथ ही घरों में मच्छरों का आतंक शुरू हो…
This website uses cookies.