India-US Trade Deal: भारतीय राजनीति में कृषि संकट और व्यापारिक संधियों को लेकर एक नया मोर्चा खुल गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को संसद भवन परिसर में देश के विभिन्न राज्यों से आए किसान संगठनों के प्रमुख नेताओं के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक का मुख्य एजेंडा भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते के खिलाफ एक व्यापक रणनीति तैयार करना था। राहुल गांधी ने किसान नेताओं के साथ बंद कमरे में हुई इस चर्चा के दौरान यह स्पष्ट किया कि देश के अन्नदाता और खेत मजदूरों की रोजी-रोटी पर किसी भी तरह का प्रहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: किसानों की चिंताएं और विरोध
बैठक में शामिल किसान संगठनों ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर अपनी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। नेताओं का तर्क है कि यदि यह समझौता पूरी तरह लागू होता है, तो मक्का, सोयाबीन, कपास, फल और मेवे उगाने वाले भारतीय किसानों के सामने अस्तित्व का संकट पैदा हो जाएगा। उन्हें डर है कि अमेरिकी कृषि उत्पादों के सस्ते आयात से भारतीय मंडियों में स्थानीय फसलों के दाम गिर जाएंगे, जिससे किसान कर्ज के जाल में और गहराई तक धंस सकते हैं। किसानों ने इस समझौते को भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए ‘डेथ वारंट’ करार देते हुए इसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
कृषि उत्पादों के आयात का खतरा: राहुल गांधी की सीधी चेतावनी
राहुल गांधी ने किसान संगठनों की चिंताओं पर मुहर लगाते हुए कहा कि यह समझौता केवल कुछ फसलों तक सीमित नहीं रहेगा। कांग्रेस के मुताबिक, राहुल गांधी ने चेतावनी दी है कि इस समझौते के माध्यम से विदेशी कृषि उत्पादों के लिए भारत के दरवाजे खोल दिए गए हैं। उन्होंने कहा, “आज मक्का और सोयाबीन प्रभावित हो रहे हैं, तो कल धान और गेहूं की बारी आएगी।” राहुल का मानना है कि यह समझौता सीधे तौर पर भारत की खाद्य सुरक्षा को कमजोर करने की एक सोची-समझी साजिश है, जिससे देश की आत्मनिर्भरता को गहरा धक्का लग सकता है।
राष्ट्रीय आंदोलन की रूपरेखा: सड़क से संसद तक घेराबंदी
इस बैठक का सबसे बड़ा नतीजा एक बड़े स्तर पर ‘राष्ट्रीय आंदोलन’ शुरू करने के निर्णय के रूप में सामने आया है। किसान नेताओं और राहुल गांधी के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि इस व्यापार समझौते के विरोध में देशभर के गांवों और कस्बों में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। यह आंदोलन न केवल किसानों को जागरूक करेगा, बल्कि सरकार पर इस समझौते को वापस लेने या इसमें संशोधन करने के लिए दबाव भी बनाएगा। रणनीति के अनुसार, आने वाले हफ्तों में विभिन्न राज्यों के किसान संगठन एकजुट होकर राजधानी दिल्ली की ओर कूच करने की योजना बना रहे हैं।
बैठक में शामिल प्रमुख चेहरे: अखिल भारतीय स्तर पर एकजुटता
राहुल गांधी से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में देश के दिग्गज किसान नेता शामिल थे। इनमें अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के प्रमुख सुखपाल सिंह खैरा के साथ-साथ हरियाणा से भारतीय किसान मजदूर यूनियन के अशोक बलहारा, बीकेयू क्रांतिकारी के बलदेव सिंह जीरा और प्रोग्रेसिव फार्मर्स फ्रंट के आर. नंदकुमार जैसे नाम शामिल थे। साथ ही, बीकेयू शहीद भगत सिंह के अमरजीत सिंह मोह्री और जम्मू-कश्मीर जमीदारा फोरम के हमीद मलिक ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इन नेताओं की मौजूदगी दर्शाती है कि यह विरोध केवल पंजाब या हरियाणा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरे देश में फैल चुका है।
सरकार पर तीखा हमला: “प्रधानमंत्री देश के किसानों को बेच रहे हैं”
राहुल गांधी ने इस बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि सरकार चाहे उनके खिलाफ FIR दर्ज करे या विशेषाधिकार प्रस्ताव लाए, वे पीछे नहीं हटेंगे। राहुल ने आरोप लगाया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के जरिए पीएम मोदी देश के हितों को विदेशी ताकतों के हाथों बेच रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि कोई भी समझौता जो किसान विरोधी हो और देश की खाद्य सुरक्षा को खतरे में डाले, उसे कांग्रेस किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी।
Read More: Trump Iran Strategy: ट्रंप की नई रणनीति, ईरान की घेराबंदी के लिए भेजा दुनिया का सबसे बड़ा युद्धपोत


















