Gen Z Politics : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर कांग्रेस ने अपनी चुनावी रणनीति पर काम तेज कर दिया है। पार्टी ने प्रदेश में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए त्रिस्तरीय रणनीति तैयार की है। इसके तहत एक ओर युवा और जेन-जी मतदाताओं के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने की कोशिश होगी, वहीं दूसरी तरफ संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय किया जाएगा। इसके साथ ही समाजवादी पार्टी के साथ संभावित सीट बंटवारे को लेकर स्थिति जल्द स्पष्ट करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

GenZ और युवाओं को साधने की कांग्रेस की रणनीति
कांग्रेस पार्टी का पहला फोकस उत्तर प्रदेश के युवाओं और जेन-जी मतदाताओं पर है। इसी रणनीति के तहत लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी प्रयागराज में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में युवाओं और छात्रों से संवाद करने पहुंचे। पार्टी की ओर से इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्रों के शामिल होने का दावा किया गया। इससे पहले राहुल गांधी कोटा और देहरादून में भी इसी तरह के कार्यक्रमों में युवाओं से बातचीत कर चुके हैं।

शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर युवाओं से जुड़ने की कोशिश
कांग्रेस का मानना है कि राहुल गांधी लगातार छात्रों, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाकर इस वर्ग के बीच पार्टी की स्वीकार्यता बढ़ा रहे हैं। पार्टी की नजर खासतौर पर उन युवाओं पर है जो पहली बार मतदान करेंगे। शिक्षा व्यवस्था, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर युवाओं में असंतोष की स्थिति को कांग्रेस अपने पक्ष में बदलने की कोशिश कर रही है।
NEET आंदोलन से जुड़े युवाओं पर भी नजर
हाल के दिनों में प्रतियोगी परीक्षाओं और NEET से जुड़े आंदोलनों में उत्तर प्रदेश के युवाओं की भागीदारी देखने को मिली थी। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के अलावा प्रयागराज, लखनऊ और राज्य के अन्य हिस्सों में भी युवाओं ने विरोध प्रदर्शन किए थे। कांग्रेस अब इसी वर्ग को 2027 के विधानसभा चुनाव में अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी को उम्मीद है कि नए मतदाताओं के बीच मजबूत पकड़ चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
सपा के साथ सीट शेयरिंग पर मंथन तेज
युवाओं के बीच पहुंच बढ़ाने के साथ कांग्रेस की दूसरी बड़ी प्राथमिकता समाजवादी पार्टी के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर तस्वीर साफ करना है। पार्टी चाहती है कि चुनावी रणनीति और सीट शेयरिंग को लेकर जल्द निर्णय हो, ताकि प्रदेश स्तर के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच किसी तरह का भ्रम न रहे। इसी दिशा में कांग्रेस के भीतर लगातार विचार-विमर्श का दौर चल रहा है।

प्रियंका गांधी ने सांसदों के साथ की बैठक
सीट बंटवारे को लेकर हाल ही में प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश से जुड़े कांग्रेस के छह लोकसभा सांसदों और राज्यसभा सांसदों के साथ बैठक की। इस दौरान प्रदेश की राजनीतिक स्थिति और संभावित सीट शेयरिंग पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई है। माना जा रहा है कि कांग्रेस और सपा के बीच सीटों को लेकर 20 अगस्त तक कोई महत्वपूर्ण तस्वीर सामने आ सकती है।
संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर जोर
कांग्रेस की तीसरी प्राथमिकता उत्तर प्रदेश में संगठन को मजबूत करना है। पार्टी ने हाल के समय में संगठनात्मक स्तर पर कई बदलाव किए हैं और विभिन्न पदों पर नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। कांग्रेस का उद्देश्य बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। पार्टी मानती है कि मजबूत संगठन के बिना चुनावी रणनीति को प्रभावी तरीके से जमीन पर उतारना मुश्किल होगा।
दलित वोट बैंक पर कांग्रेस की नजर
बहुजन समाज पार्टी के कमजोर होते राजनीतिक प्रभाव के बीच कांग्रेस दलित मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसी रणनीति के तहत अंबेडकरवादी नेता राजेंद्र पाल गौतम को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। पार्टी का प्रयास है कि दलित समुदाय के बीच संगठनात्मक पहुंच बढ़ाई जाए और उन्हें कांग्रेस के साथ जोड़ा जाए।
संगठन में नए चेहरों को मिली जिम्मेदारी
कांग्रेस ने पुराने AICC सचिवों की जगह कई नए नेताओं को उत्तर प्रदेश में जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इनमें अभिषेक दत्त, कुणाल चौधरी, जगदीश चंद्र जांगिड़, वरुण चौधरी, संजीव आर्य और अब्दुल हन्नान जैसे नाम शामिल हैं। इन बदलावों के जरिए पार्टी प्रदेश में संगठन को अधिक सक्रिय और चुनावी अभियान के लिए तैयार करना चाहती है। अब देखना होगा कि युवाओं पर फोकस, सपा के साथ सीट शेयरिंग और संगठनात्मक बदलाव की यह रणनीति 2027 के चुनाव में कांग्रेस को कितना फायदा पहुंचाती है।
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