Rahul Gandhi Meeting : नई दिल्ली में कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आदिवासी समुदाय से जुड़े प्रमुख नेताओं और विधायकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में छत्तीसगढ़ के प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम सहित कई अन्य आदिवासी नेता मौजूद रहे। बैठक का उद्देश्य आदिवासियों के विकास और उनके अधिकारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श करना था। जल, जंगल, जमीन जैसे बुनियादी विषय इस चर्चा का केंद्र रहे।

आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड की मांग
बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ के विधायक जनकराम ध्रुव ने राहुल गांधी से अनुरोध किया कि वे विधानसभा और संसद में आदिवासियों के लिए एक अलग धर्म कोड लागू करने की मांग करें। उन्होंने बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में नेतृत्व को मजबूत करने के लिए विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित करने पर भी जोर दिया। उनका मानना था कि इससे आदिवासी नेताओं की क्षमता बढ़ेगी और वे अपने समुदाय के मुद्दों को बेहतर तरीके से उठा पाएंगे।
आदिवासी नेताओं की एक घंटे तक चली चर्चा
कांग्रेस के कई आदिवासी नेता और विधायक लगभग एक घंटे तक इस बैठक में शामिल रहे। इसमें प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम, विधायक अनिला भेड़िया, लखेश्वर बघेल, विद्यावती सिदार, जनकराम ध्रुव, अंबिका मरकाम जैसे नेता मौजूद थे। इस दौरान आदिवासी हितों से जुड़े तमाम सवालों पर खुलकर चर्चा हुई और आगामी रणनीतियों पर विचार किया गया।
जंगलों की अंधाधुंध कटाई और अधिकारों का हनन
बैठक में विधायक जनकराम ध्रुव ने छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के अधिकारों का उल्लंघन और जंगलों की तेजी से हो रही कटाई पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार पेशा कानून का उल्लंघन करते हुए जंगलों की अंधाधुंध कटाई को रोकने में विफल रही है, जिससे आदिवासी समुदाय के जीवनयापन के साधन प्रभावित हो रहे हैं। ध्रुव ने यह भी बताया कि ऐसे हालात में बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल इलाकों में आदिवासी नेतृत्व को मजबूत करने की बेहद जरूरत है।
फर्जी मुठभेड़ों में आदिवासियों की मौत पर चिंता
विधायक ध्रुव ने विधानसभा चुनाव में बस्तर और सरगुजा में कांग्रेस के करारी हार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि फर्जी मुठभेड़ों में निर्दोष आदिवासियों की मौत ने आदिवासी समाज में असहनीय पीड़ा और भय का माहौल बनाया है। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों को गंभीरता से उठाना और आदिवासी नेताओं को सशक्त करना आवश्यक है ताकि वे अपने समाज की सुरक्षा और विकास के लिए प्रभावी भूमिका निभा सकें।
आदिवासियों के विकास के लिए मिले फंड का गलत उपयोग
जनकराम ध्रुव ने एक और गंभीर विषय उठाया कि केंद्र सरकार से आदिवासी विकास के लिए छत्तीसगढ़ सरकार को जो फंड मिलता है, उसका उपयोग सही जगह पर नहीं हो रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि ये फंड अक्सर अन्य गैर-जरूरी कार्यों में खर्च किया जाता है, जिससे आदिवासी समुदाय को न्याय नहीं मिल पाता। ध्रुव ने राहुल गांधी से इस मुद्दे को संसद में जोर-शोर से उठाने का आग्रह किया ताकि आदिवासियों को उनका हक मिल सके। बैठक में बच्चों के शिक्षा के अधिकार से वंचित होने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी बात हुई। आदिवासी क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा से दूर रखने और सरकारी सुविधाओं से वंचित करने की बातें उठाई गईं। नेताओं ने इस समस्या को गंभीरता से लेकर उसके समाधान के लिए ठोस कदम उठाने पर जोर दिया।
भाजपा के “वनवासी” शब्द का विरोध
बैठक में महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के आदिवासी नेताओं ने भाजपा सरकार द्वारा आदिवासियों को “वनवासी” कहे जाने का कड़ा विरोध जताया। नेताओं का कहना था कि भाजपा इस शब्द का प्रयोग कर आदिवासी पहचान को कमजोर करने और उनके अधिकारों का हनन करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह जारी रहा, तो आदिवासियों को जल्द ही “स्वर्गवासी” कहकर पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। साथ ही बैठक में आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड बनाए जाने की भी मांग जोर-शोर से उठाई गई।
आदिवासी नेताओं ने कांग्रेस को मजबूत करने पर दिया जोर
बैठक के समापन में नेताओं ने आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए आदिवासी नेतृत्व को मजबूत करने और संगठनात्मक स्तर पर काम करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासियों के हितों की लड़ाई तभी मजबूत होगी जब नेतृत्व और संगठन मजबूत होगा। इस दिशा में ट्रेनिंग प्रोग्राम, जागरूकता अभियानों और समुदाय के भीतर संवाद को बढ़ावा देना जरूरी है।
आदिवासियों के लिए कांग्रेस की प्रतिबद्धता
राहुल गांधी के नेतृत्व में हुई यह बैठक आदिवासी समुदाय के प्रति कांग्रेस की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। जल-जंगल-जमीन के मुद्दे, शिक्षा, अधिकार, फंड के दुरुपयोग और पहचान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर हुई चर्चा से साफ है कि पार्टी आदिवासियों के विकास और सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह से संकल्पित है। आगामी चुनावों में आदिवासी क्षेत्रों में पार्टी की रणनीति और नेतृत्व को मजबूत करने के लिए यह बैठक एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।


















