India Energy Security
India Energy Security: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने देश की ऊर्जा नीति और अंतरराष्ट्रीय दबाव को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। सदन में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने भारत की संप्रभुता और ऊर्जा सुरक्षा को देश की सबसे महत्वपूर्ण नींव करार दिया। राहुल गांधी ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत जैसे विशाल राष्ट्र को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी दूसरे देश के निर्देशों का मोहताज नहीं होना चाहिए।
राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) के महत्व को रेखांकित करते हुए की। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी देश की प्रगति और उसकी आत्मनिर्भरता की नींव उसकी ऊर्जा सुरक्षा पर टिकी होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि देश अपनी मर्जी से यह तय नहीं कर सकता कि वह किससे ईंधन खरीदेगा, तो उसकी स्वायत्तता का क्या अर्थ रह जाता है? राहुल के अनुसार, ऊर्जा नीति केवल अर्थशास्त्र का विषय नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र की मजबूती का सबसे अहम हिस्सा है।
कांग्रेस नेता ने वैश्विक भू-राजनीति का जिक्र करते हुए अमेरिका की भूमिका पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अमेरिका या किसी अन्य देश को यह तय करने का अधिकार नहीं होना चाहिए कि भारत किससे तेल खरीदेगा और किससे गैस। उन्होंने विशेष रूप से रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर कहा, “भारत जितना बड़ा देश किसी दूसरे राष्ट्र या उसके राष्ट्रपति को यह अनुमति क्यों देने देगा कि हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं?” राहुल ने तर्क दिया कि भारत को अपने तेल आपूर्तिकर्ताओं के साथ संबंध बनाने की पूर्ण स्वतंत्रता होनी चाहिए।
रूसी तेल की खरीद को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही खींचतान पर राहुल गांधी ने भारत के पक्ष को मजबूती से रखने की वकालत की। उन्होंने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि भारत को अपनी विदेश नीति और व्यापारिक रिश्तों को स्वयं परिभाषित करना चाहिए। किसी बाहरी शक्ति को यह अधिकार नहीं दिया जा सकता कि वह हमारे द्विपक्षीय संबंधों की रूपरेखा तय करे। उन्होंने इसे सीधे तौर पर देश के आत्मसम्मान और कूटनीतिक स्वतंत्रता से जोड़कर पेश किया।
भाषण के दौरान राहुल गांधी ने एक रहस्यमयी ‘पहेली’ का जिक्र कर सदन में हलचल पैदा कर दी। उन्होंने ऊर्जा मंत्री की ओर इशारा करते हुए कहा, “मैंने पहेली सुलझा ली है और यह पहेली समझौतों के बारे में है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार में बैठे जिम्मेदार लोग निजी संबंधों के आधार पर नीतियां प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने विवादास्पद ‘मिस्टर एपस्टीन’ का नाम लेकर तेल मंत्री पर निशाना साधा और कहा कि मंत्री ने स्वयं इस मित्रता की बात स्वीकार की है।
अपने संबोधन के समापन में राहुल गांधी ने दोहराया कि भारत को एक वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी पहचान बनाए रखने के लिए बाहरी दबावों को खारिज करना होगा। उन्होंने कहा कि हमारे रिश्ते किसके साथ होंगे, यह केवल भारत की जनता और उसकी चुनी हुई सरकार को तय करना चाहिए, न कि वाशिंगटन या किसी अन्य विदेशी राजधानी को। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह स्पष्ट करे कि ऊर्जा समझौतों के पीछे वास्तविक मंशा क्या है और क्या देश की संप्रभुता से कोई समझौता किया जा रहा है?
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