Supreme Court March : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष ने अपना विरोध तेज कर दिया है। सोमवार को विपक्षी नेताओं ने दिल्ली में संविधान क्लब से सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च शुरू किया। इस मार्च का नेतृत्व लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने किया। विपक्षी दलों का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी चिंताओं को सामने रखना है।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले हैं 8 सांसद
करीब 8 सांसद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले हैं। वे सभी एक ही याचिका में पक्षकार होंगे। दो मुद्दों- CEC और विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर अलग-अलग याचिकाएं दायर किए जाने की भी संभावना है।
3:54 PM (IST)Oct 12, 2026
सुप्रीम कोर्ट परिसर में आ सकेंगे कांग्रेस नेता
राहुल गांधी व कांग्रेस नेता याचिका दाखिल करने सुप्रीम कोर्ट परिसर में आ सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात की सहमति दी है कि 5-10 नेता अपने वकीलों के साथ सुप्रीम कोर्ट परिसर में फाइलिंग काउंटर पर याचिका दाखिल कर सकते हैं। ये काउंटर हाई सिक्योरिटी क्षेत्र के बाहर है, जहां लोग बिना पास के जा सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, CJI सूर्यकांत ने भी इस पर सहमति जताई है।
इंडिया गठबंधन की बैठक में बनी आंदोलन की रणनीति
सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च शुरू करने से पहले राजधानी दिल्ली में इंडिया गठबंधन के नेताओं की बैठक हुई। इस बैठक में आंदोलन की आगे की दिशा और रणनीति पर चर्चा की गई। विपक्षी नेताओं ने कथित चुनावी अनियमितताओं, SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर अपनी मांगों पर विचार-विमर्श किया। बैठक के बाद नेताओं ने एक साथ आगे बढ़ते हुए सुप्रीम कोर्ट की ओर कूच किया।
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने संभाली कमान
मार्च में राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे प्रमुख रूप से शामिल रहे। उनके साथ कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत अन्य विपक्षी नेता भी मौजूद थे। विपक्षी नेताओं की एकजुट भागीदारी को इस आंदोलन के राजनीतिक महत्व से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, मार्च के बाद की कार्रवाई और विपक्ष की मांगों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया के बारे में आगे की जानकारी सामने आना बाकी है।
SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की क्या है आपत्ति?
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के तहत मतदाता सूची की जांच और संशोधन की प्रक्रिया को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की आशंकाओं को गंभीरता से देखा जाना चाहिए। इसी मुद्दे के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी विपक्ष अपना विरोध दर्ज करा रहा है। इन आरोपों और मांगों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित तथ्यों तथा सक्षम संस्थाओं की कार्रवाई के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होंगी तीन याचिकाएं
इस घटनाक्रम के बीच सूत्रों के हवाले से जानकारी सामने आई है कि विपक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में तीन याचिकाएं दाखिल की जाएंगी। बताया गया है कि ये याचिकाएं एडवोकेट प्रसन्ना के वकालतनामे के साथ दाखिल होंगी। हालांकि, याचिकाओं में उठाए जाने वाले सभी मुद्दों, उनकी विस्तृत मांगों और अदालत में दाखिल किए जाने के समय को लेकर उपलब्ध जानकारी सीमित है। इसलिए इन याचिकाओं के विषय में अंतिम विवरण सामने आने के बाद ही उनकी कानूनी प्रकृति स्पष्ट हो सकेगी।
अब सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर टिकी निगाहें
विपक्ष के मार्च और तीन याचिकाएं दाखिल करने की तैयारी के बाद अब इस घटनाक्रम पर सबकी निगाहें टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि याचिकाओं में किन मुद्दों को प्रमुखता दी जाती है और अदालत के समक्ष क्या मांगें रखी जाती हैं। साथ ही, SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े विवाद पर आगे क्या कानूनी तथा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आते हैं, इस पर भी नजर रहेगी। फिलहाल, याचिकाओं की वास्तविक सामग्री और अदालत की प्रतिक्रिया की पुष्टि होने के बाद ही आगे की स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
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