Rahul Gandhi Gujarat : कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इन दिनों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के गढ़ माने जाने वाले गुजरात पर खासा ध्यान दे रहे हैं। गुरुवार को वह एक बार फिर जूनागढ़ में जिला कांग्रेस कमेटी (DCC) के अध्यक्षों के प्रशिक्षण शिविर में शामिल हुए। यह दौरा खास इसलिए है क्योंकि बीते छह महीनों में राहुल का यह सातवां गुजरात दौरा है, और बीते एक हफ्ते में दूसरी यात्रा।
गुजरात न केवल भाजपा का मजबूत किला है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की कर्मभूमि भी है। ऐसे में राहुल गांधी अगर यहां भाजपा की पकड़ कमजोर कर पाते हैं, तो यह सिर्फ एक राज्य की हार नहीं बल्कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को सीधी चुनौती मानी जाएगी। राहुल खुद भी कह चुके हैं कि “बीजेपी को राष्ट्रीय स्तर पर हराने का रास्ता गुजरात से होकर जाता है।”
2022 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार मिली थी — पार्टी केवल 17 सीटें जीत सकी और उसका वोट शेयर 28% तक गिर गया। दूसरी ओर, बीजेपी ने रिकॉर्ड 156 सीटें जीतकर सत्ता कायम रखी। आम आदमी पार्टी ने भी 5 सीटें जीतकर कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाई। ऐसे में राहुल गांधी अब संगठन को फिर से खड़ा करने में जुटे हैं।
वर्तमान में चल रहे ट्रेनिंग कैंपों में पार्टी कार्यकर्ताओं को कांग्रेस की विचारधारा, रणनीति और जमीनी संघर्ष के गुर सिखाए जा रहे हैं। राहुल गांधी का लक्ष्य स्पष्ट है — 2027 में गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा को कड़ी टक्कर देना और कांग्रेस की वापसी सुनिश्चित करना।
2017 में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 77 सीटें जीती थीं और भाजपा को 99 सीटों तक सीमित कर दिया था। उस समय राहुल गांधी पार्टी अध्यक्ष थे और उनका आक्रामक प्रचार काम आया था। अब राहुल उसी आत्मविश्वास के साथ फिर से गुजरात में वापसी की राह तलाश रहे हैं।
राहुल गांधी गुजरात में कांग्रेस को नई टीम और नई सोच के साथ खड़ा करने में लगे हैं। जिला स्तर पर नए नेतृत्व को प्रशिक्षित किया जा रहा है, और राहुल खुद हर जिले का दौरा कर जमीनी हालात का जायजा ले रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस कैंप में भाजपा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि “गुजरात ने देश को आजादी दिलाई, लेकिन आज वहीं से लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है।”
गुजरात में राहुल गांधी की सक्रियता सिर्फ एक राज्य के चुनाव की तैयारी नहीं है, बल्कि यह 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए भी माहौल तैयार करने की कोशिश है। अगर कांग्रेस यहां वापसी करती है, तो यह पूरे देश के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश होगा। हालांकि, राहुल की मेहनत कितनी रंग लाती है, इसका फैसला 2027 के चुनाव नतीजे ही करेंगे।
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