Raigarh Coal Mine Violence: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है, जहां जिंदल कोयला खदान के खिलाफ चल रहा ग्रामीणों का प्रदर्शन अचानक उग्र हो गया। शांतिपूर्ण दिख रहा यह आंदोलन देखते ही देखते रणक्षेत्र में बदल गया, जिसमें पुलिस और ग्रामीणों के बीच जमकर टकराव हुआ। इस हिंसक झड़प में एक महिला पुलिस अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गई हैं और आक्रोशित भीड़ ने निजी वाहनों को आग के हवाले कर दिया। फिलहाल इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और जिला प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है।

Raigarh Coal Mine Violence: जनसुनवाई के विरोध में सुलग रही थी असंतोष की आग
इस पूरे बवाल की जड़ 8 दिसंबर को आयोजित की गई एक जनसुनवाई है। रायगढ़ के तमनार क्षेत्र में जिंदल कोयला खदान के विस्तार को लेकर प्रशासन द्वारा जनसुनवाई बुलाई गई थी। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से नियम विरुद्ध थी और इसमें उनके हितों की अनदेखी की गई। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने उनकी आपत्तियों को दर्ज किए बिना ही खदान को मंजूरी देने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसी ‘अवैध’ जनसुनवाई को रद्द करने की मांग को लेकर क्षेत्र के ग्रामीण पिछले कई दिनों से लामबंद होकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।

Raigarh Coal Mine Violence: पुलिस टीम पर अचानक हमला और टीआई गंभीर रूप से घायल
शनिवार को आंदोलनकारियों ने तमनार के ‘मनार सीएचपी चौक’ पर चक्काजाम कर दिया था, जिससे कोयला परिवहन और यातायात पूरी तरह ठप हो गया। जब स्थिति को संभालने और जाम खुलवाने के लिए पुलिस की टीम मौके पर पहुंची, तो प्रदर्शनकारी भड़क उठे। बातचीत के दौरान ही विवाद बढ़ गया और भीड़ ने पुलिस बल पर पथराव व लाठियों से हमला कर दिया। इस हमले में तमनार की थाना प्रभारी (TI) कमला पुसाम को सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। उन्हें तुरंत लहूलुहान हालत में नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी स्थिति पर डॉक्टर नजर बनाए हुए हैं।

आगजनी और तोड़फोड़ से दहला तमनार क्षेत्र
पुलिस टीम पर हमला करने के बाद प्रदर्शनकारियों का गुस्सा यहीं नहीं थमा। आक्रोशित भीड़ ने मौके पर खड़ी एक बस और कार में तोड़फोड़ की और फिर उन्हें आग के हवाले कर दिया। धू-धू कर जलते वाहनों के कारण इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। घटनास्थल पर चारों तरफ कांच के टुकड़े और पत्थर बिखरे हुए हैं। आगजनी की इस घटना ने प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

भारी सुरक्षा बल तैनात और एसपी ने संभाला मोर्चा
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए रायगढ़ के पुलिस अधीक्षक (SP) खुद दलबल के साथ मौके के लिए रवाना हो गए हैं। जिले के अन्य थानों से भी अतिरिक्त रिजर्व फोर्स को तमनार में बुला लिया गया है। वर्तमान में पूरा आंदोलन स्थल छावनी में तब्दील हो चुका है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्थिति अभी नियंत्रण में है, लेकिन तनाव बरकरार है। पुलिस वीडियो फुटेज और साक्ष्यों के आधार पर हमलावरों की पहचान करने में जुट गई है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
खदान विवाद: पर्यावरण और आजीविका का सवाल
यह विवाद केवल एक जनसुनवाई तक सीमित नहीं है। रायगढ़ के इस क्षेत्र में कोयला खदानों के कारण पर्यावरण प्रदूषण और विस्थापन एक बड़ा मुद्दा रहा है। ग्रामीण लगातार मांग कर रहे हैं कि उनकी जमीन और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। जानकारों का मानना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते ग्रामीणों के साथ संवाद नहीं किया, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप ले सकता है। फिलहाल, क्षेत्र के लोग डरे हुए हैं और पुलिस संदिग्धों की धरपकड़ के लिए गश्त कर रही है।
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