Raigarh Court verdict: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से न्याय की एक बड़ी मिसाल सामने आई है। यहाँ की एक विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने 6 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले 23 वर्षीय युवक को ऐतिहासिक सजा सुनाई है। अदालत ने मामले की गंभीरता और अपराधी की क्रूरता को देखते हुए उसे आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है, जो उसके शेष प्राकृतिक जीवन तक जारी रहेगी। इसका अर्थ है कि दोषी अब अपनी अंतिम सांस तक जेल की सलाखों के पीछे ही रहेगा। न्यायाधीश देवेन्द्र साहू की पीठ ने समाज में कड़ा संदेश देने के उद्देश्य से यह फैसला सुनाया है।
मजबूर मां की आपबीती: संघर्ष के बीच टूटा दुखों का पहाड़
इस मामले की शुरुआत तब हुई जब पीड़िता की मां ने रायगढ़ के महिला थाने में अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराई। मां ने पुलिस को बताया कि वह एक विधवा है और दूसरों के घरों में झाड़ू-पोंछा और मजदूरी कर अपनी दो बेटियों का पालन-पोषण कर रही है। उसकी छोटी बेटी, जिसकी उम्र महज 6 साल है, अक्सर अपने ताऊ (जेठ) के पान ठेले पर खेलने जाया करती थी। 18 मार्च 2025 की उस काली रात ने इस गरीब परिवार की खुशियों को उजाड़ कर रख दिया, जब मासूम बच्ची रोती हुई और सहमी हुई घर लौटी।
आइसक्रीम का लालच और दरिंदगी: वारदात का खौफनाक विवरण
बच्ची ने घर पहुँचकर अपनी मां को रोते हुए बताया कि पान ठेले के बगल में स्थित पाव भाजी की दुकान में काम करने वाला सूरज निषाद उसे बहला-फुसलाकर पास ले गया। आरोपी ने मासूम को आइसक्रीम खिलाने का लालच दिया और उसे गोद में उठाकर दुकान के ऊपर बने एक सुनसान कमरे में ले गया। वहां उसने मासूम के साथ हैवानियत की हदें पार कर दीं। जब बच्ची दर्द से चिल्लाने लगी, तो आरोपी ने उसका मुंह दबा दिया और उसके साथ जबरदस्ती गंदी हरकत (रेप) की। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मासूम को वहीं छोड़कर फरार हो गया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई: बीएनएस और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला
पीड़िता की मां की शिकायत पर रायगढ़ पुलिस ने बिना समय गंवाए कार्रवाई शुरू की। आरोपी सूरज निषाद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 65(2) और लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) की धारा 4 के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपी को घेराबंदी कर गिरफ्तार किया और अदालत में पेश किया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे फास्ट ट्रैक कोर्ट (पॉक्सो) को सौंप दिया गया, ताकि पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द न्याय मिल सके।
अदालत का ऐतिहासिक फैसला: प्राकृतिक जीवन के अंत तक कारावास
अतिरिक्त सत्र न्यायालय एफटीएससी (पॉक्सो) के न्यायाधीश देवेन्द्र साहू ने मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। चिकित्सा साक्ष्यों और बच्ची के बयान के आधार पर अदालत ने सूरज निषाद को दोषी करार दिया। अदालत ने टिप्पणी की कि बच्चों के खिलाफ ऐसे अपराध समाज के लिए कलंक हैं। सजा सुनाते हुए न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आरोपी को शेष प्राकृतिक जीवन तक आजीवन कारावास भुगतना होगा। साथ ही उस पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इस फैसले का स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है।
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