Raigarh Industrial Crisis:
Raigarh Industrial Crisis: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्थित विभिन्न उद्योगों में पिछले कुछ समय से लगातार हो रहे हादसों और सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी ने अब एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक रूप ले लिया है। सोमवार को भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) और युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के कार्यालय का घेराव किया। भारी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जमकर नारेबाजी की। उनका आरोप है कि विभाग की निष्क्रियता के कारण उद्योग प्रबंधन बेखौफ होकर सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, जिसका खामियाजा गरीब श्रमिकों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने विभाग के अधिकारियों को खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि उद्योगों में जब भी कोई बड़ा हादसा होता है, तो प्रबंधन और प्रशासन केवल मुआवजे का लालच देकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश करते हैं। कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया कि हादसे होने के बाद जांच करने के बजाय, सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए पहले से सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जाती? उन्होंने स्पष्ट किया कि एक श्रमिक के जीवन की कीमत केवल कुछ लाख रुपये का मुआवजा नहीं हो सकती। प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि कार्यस्थल इतना सुरक्षित हो कि कोई दुर्घटना ही न घटे।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान हाल ही में ‘रूपाणाधाम स्टील प्राइवेट लिमिटेड’ में हुई श्रमिक दीपक चौहान की दर्दनाक मौत का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। युवा कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि दीपक चौहान की मौत कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों में व्याप्त सुरक्षा की बदहाली का जीता-जागता प्रमाण है। यदि समय-समय पर उद्योगों का सेफ्टी ऑडिट किया गया होता और विभाग के निरीक्षक कार्यस्थलों की वास्तविकता की जांच करते, तो शायद आज दीपक अपने परिवार के बीच जीवित होता। इस घटना ने पूरे जिले के श्रमिकों में असुरक्षा का भाव पैदा कर दिया है।
युवा कांग्रेस के उग्र प्रदर्शन की सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को संभालने का प्रयास किया। माहौल को तनावपूर्ण देखते हुए औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जिले के सभी बड़े उद्योगों की एक संयुक्त सुरक्षा समीक्षा बैठक जल्द ही बुलाई जाएगी। इस बैठक में सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता, कार्यस्थल की कठिन परिस्थितियों के लिए निर्धारित नियमों का पालन, नियमित निरीक्षण की व्यवस्था और प्रबंधन की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी तय की जाएगी। साथ ही, रूपाणाधाम संयंत्र में हुई दुर्घटना की तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया गया।
प्रदेश महासचिव राकेश पांडेय ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह आंदोलन केवल एक विशिष्ट घटना तक सीमित नहीं है। यह जिले के हर उस श्रमिक के जीवन और सम्मान की लड़ाई है जो अपनी जान जोखिम में डालकर उद्योगों के चक्के घुमाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक उद्योगों में सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य नहीं होता और जिम्मेदार अधिकारियों व प्रबंधन पर आपराधिक मुकदमे दर्ज नहीं किए जाते, तब तक उनका संघर्ष थमेगा नहीं। उनका कहना था कि प्रशासन को अपनी आंखें खोलनी होंगी और कागजी जांच के बजाय धरातल पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना होगा।
युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष उस्मान बेग ने जोर देकर कहा कि रायगढ़ जिले के इतिहास में पहली बार सुरक्षा के मुद्दे पर इस विभाग का इतना बड़ा घेराव किया गया है। उन्होंने इसे उद्योगपतियों और विभागीय अधिकारियों के लिए एक अंतिम चेतावनी करार दिया। उस्मान बेग ने मांग की कि ऊंचाई पर काम करने वाले श्रमिकों के लिए बेल्ट, हेलमेट और जाली जैसे अनिवार्य उपकरणों की जांच हर शिफ्ट में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब किसी भी श्रमिक की मौत को ‘सामान्य दुर्घटना’ मानकर फाइल बंद करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ज्ञापन सौंपने के बाद युवा कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि यदि मांगों पर जल्द अमल नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
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