Mangal Carbon Plant Accident: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्थित मंगल कार्बन प्लांट में हुए भीषण अग्निकांड ने एक मासूम की जान ले ली है। 5 फरवरी को हुए इस हादसे में 80-90% तक झुलस चुकी 9 महीने की बच्ची, भूमि खड़िया ने सोमवार शाम रायपुर के एक निजी बर्न्स एंड प्लास्टिक सर्जरी सेंटर में अंतिम सांस ली। मासूम की मां उसे रोज अपने साथ काम पर प्लांट ले जाया करती थी, लेकिन उस दिन फर्नेस से निकली मौत की आग ने इस नन्हीं जान को अपनी चपेट में ले लिया। बच्ची की मौत के बाद पीड़ित परिवार में मातम पसरा है और पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
कैसे हुआ हादसा: टायर पिघलाने वाले प्लांट में सुरक्षा की अनदेखी
यह भयावह घटना खरसिया थाना क्षेत्र के बानीपाथर स्थित मंगल कार्बन प्लांट की है। इस फैक्ट्री में पुराने टायरों को फर्नेस में पिघलाकर काला तेल निकाला जाता है, जिसका उपयोग सड़क निर्माण में होता है। प्रत्यक्षदर्शियों और जांच रिपोर्ट के अनुसार, फर्नेस को ठंडा किए बिना ही खोल दिया गया, जिससे आग और गर्म गैसों का जबरदस्त प्रेशर बाहर निकला। उस समय पास में ही काम कर रहे मजदूर और वहां मौजूद बच्ची आग के गोले की चपेट में आ गए। आरोप है कि प्लांट प्रबंधन ने मजदूरों को कोई भी सुरक्षा उपकरण (Safety Gear) उपलब्ध नहीं कराए थे, जिसके कारण मामूली सी लापरवाही ने बड़े हादसे का रूप ले लिया।
घायलों की स्थिति: वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच जूझते मजदूर
हादसे की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अधिकांश मजदूर 80 से 90 प्रतिशत तक झुलस चुके हैं। इस अग्निकांड में एक ही परिवार के चार लोग घायल हुए थे। साहेब लाल खड़िया और शिव खड़िया की स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है, वे 90% तक झुलसे हुए हैं। इनके अलावा कौशल पटेल, इंदीवर और प्रिया सारथी का इलाज भी रायपुर में चल रहा है, जिनमें से कई वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। डॉक्टरों के अनुसार, अगले कुछ दिन घायलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इन्फेक्शन का खतरा लगातार बना हुआ है।
प्रबंधन की दबंगई: FIR वापस लेने और बयान बदलने का दबाव
हादसे के बाद जहां संवेदना और सहायता की उम्मीद थी, वहीं परिजनों ने प्लांट प्रबंधन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। खरसिया पुलिस ने मामले में केस तो दर्ज कर लिया है, लेकिन पीड़ित परिवारों का कहना है कि प्रबंधन उन पर लगातार शिकायत वापस लेने का दबाव बना रहा है। परिजनों का आरोप है कि उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है ताकि वे अपने बयान बदल दें और प्रबंधन कानूनी कार्रवाई से बच जाए। यह स्थिति पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसी है, जिससे न्याय की उम्मीदों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मुआवजे की मांग और निष्पक्ष जांच की गुहार
पीड़ित परिवारों और स्थानीय सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में मृत बच्ची के परिवार को तत्काल उचित मुआवजा देना, सभी घायलों के इलाज का संपूर्ण खर्च प्रबंधन द्वारा वहन करना और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर प्लांट को सील करना शामिल है। साथ ही, परिजनों पर बनाए जा रहे दबाव की निष्पक्ष जांच की मांग भी जोर पकड़ रही है। एसएसपी और कलेक्टर से गुहार लगाई गई है कि दोषी अधिकारियों और प्रबंधन पर गैर-इरादतन हत्या की धाराओं के तहत कार्रवाई की जाए।
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