Raigarh Protest:
Raigarh Protest: छत्तीसगढ़ में नई कोयला खदानों को लेकर लगातार विरोध जारी है। इसी क्रम में, रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक के 14 गांवों के ग्रामीणों ने जे.पी.एल. (JPL) की प्रस्तावित कोयला खदान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं देंगे। विरोध प्रदर्शन को देखते हुए इलाके में बड़ी तादाद में सुरक्षा बल तैनात किया गया है।
रायगढ़ के तमनार ब्लॉक में जेपीएल को कोयला खदान के लिए जमीन प्रस्तावित है, लेकिन स्थानीय ग्रामीण इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों ने अपनी चिंताएँ व्यक्त करते हुए कहा कि प्रस्तावित खदान से उन्हें विस्थापन, गंभीर पर्यावरणीय नुकसान और आजीविका पर संकट का सीधा खतरा है।
ग्रामीणों का तर्क है कि तमनार और आसपास का इलाका पहले से ही विभिन्न कंपनियों के कारण प्रदूषण की चपेट में है। यहाँ भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं, और जल, जंगल और जमीन तेजी से नष्ट हो रहे हैं। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि वे प्रस्तावित कोयला खदान का हर हाल में विरोध करेंगे।
ग्रामीणों के इस विरोध आंदोलन को स्थानीय राजनीतिक समर्थन भी मिला है। लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार भी मौके पर पहुंचीं और ग्रामीणों के समर्थन में खड़ी हुईं। विधायक ने भी ग्रामीणों के साथ मिलकर जनसुनवाई निरस्त करने की मांग की। विरोध दर्ज कराने के लिए ग्रामीणों ने विधायक के नेतृत्व में मानव श्रृंखला बनाकर, जनसुनवाई के लिए टेंट न लगने देने का प्रयास किया।
यह विरोध-प्रदर्शन छत्तीसगढ़ में खदानों के खिलाफ बढ़ते जनाक्रोश का एक हिस्सा है। इससे पहले, राज्य के अन्य हिस्सों में भी विरोध की हिंसक घटनाएँ सामने आ चुकी हैं:
कोरबा (गेवरा खदान): ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया, जिसके बाद CISF ने लाठीचार्ज किया, जिसमें 10 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए।
रायगढ़ (छाल क्षेत्र): यहाँ भी 300 ग्रामीणों ने जनसुनवाई रद्द करने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया था।
सरगुजा (अमेरा ओपनकास्ट कोल माइंस): इस खदान के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हुई थी। इस झड़प में ग्रामीणों ने पुलिस पर पथराव और गुलेल से हमला किया, जिसमें एएसपी, थाना प्रभारी समेत लगभग 25 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। पुलिसकर्मियों ने भी जवाबी कार्रवाई में ग्रामीणों पर पत्थर से हमला किया था।
तमनार ब्लॉक में प्रस्तावित गारे-पेलमा कोल ब्लॉक सेक्टर-1 की जनसुनवाई को निरस्त करने की मांग पर ग्रामीण 5 दिसंबर से ही अड़े हुए हैं। इस आंदोलन में झरना, आमगांव, कोसमपाली, पतरापाली, जांजगीर, गोढ़ी, कसडोल, महलोई, सरसमाल सहित लगभग 14 गांवों के लोग शामिल हैं। ये सभी ग्रामीण धौराभांठा स्कूल मैदान में धरने पर बैठे हैं। उनका दृढ़ संकल्प है कि वे किसी भी नई कंपनी या कोयला खदान को इस क्षेत्र में शुरू नहीं होने देंगे।
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