Raipur Land Case
Raipur Land Grabbing Case: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के वीआईपी इलाके खम्हारडीह में जमीन पर अवैध कब्जे और दबंगई का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। यहाँ कांग्रेस के पूर्व पार्षद राकेश धोतरे पर एक निजी स्वामित्व वाली भूमि की बाउंड्री वॉल को ढहाने और उस पर जबरन कब्जा करने का संगीन आरोप लगा है। पीड़ित पक्ष की शिकायत पर तत्परता दिखाते हुए रायपुर पुलिस ने पूर्व पार्षद के विरुद्ध गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध कर लिया है। इस हाई-प्रोफाइल विवाद ने शहर के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है, क्योंकि आरोपी का संबंध सत्ता और रसूखदार पृष्ठभूमि से रहा है।
मामले का खुलासा तब हुआ जब श्याम नगर, तेलीबांधा निवासी अनिल बालानी (55 वर्ष) ने खम्हारडीह थाने में न्याय की गुहार लगाई। पीड़ित अनिल बालानी के अनुसार, शंकर नगर स्थित 0.251 हेक्टेयर भूमि उनके स्वामित्व में है और वे साल 2006 से इस पर काबिज हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि इस जमीन की रजिस्ट्री, नामांतरण और सरकारी सीमांकन की प्रक्रिया वर्षों पहले कानूनी रूप से पूरी की जा चुकी है। विवाद की शुरुआत 2 मार्च 2026 को हुई, जब अनिल अपनी जमीन का मुआयना करने पहुंचे। वहां का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए; सालों पुरानी बाउंड्री वॉल मलबे में तब्दील हो चुकी थी और जमीन के स्वरूप को बदलकर उस पर कब्जा करने की कोशिश की गई थी।
पीड़ित अनिल बालानी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि जब उन्होंने बाउंड्री वॉल टूटने के संबंध में मौके पर पूछताछ की, तो पूर्व पार्षद राकेश धोतरे ने सीधे तौर पर स्वीकार किया कि दीवार उन्होंने ही तुड़वाई है। इतना ही नहीं, आरोप है कि राकेश धोतरे ने उक्त कीमती जमीन को अपना बताते हुए अनिल बालानी को वहां से भाग जाने को कहा। पीड़ित का दावा है कि विरोध करने पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने और शारीरिक नुकसान पहुंचाने की खुली धमकी और चेतावनी दी गई। रसूख के दम पर जमीन हथियाने के इस प्रयास ने पीड़ित परिवार को गहरे सदमे और असुरक्षा के भाव में डाल दिया है।
खम्हारडीह थाना पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आरोपी राकेश धोतरे के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है। पुलिस ने मामले में धारा 324(5), 329 और 351(2) के अंतर्गत केस रजिस्टर किया है, जो संपत्ति को नुकसान पहुँचाने, आपराधिक अतिचार और धमकी देने से संबंधित हैं। थाना प्रभारी ने बताया कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है। जमीन के असली मालिकाना हक की पुष्टि के लिए तहसील कार्यालय से आधिकारिक दस्तावेजों और खसरा-बी1 की प्रतियों का मिलान किया जा रहा है।
रायपुर पुलिस अब इस विवाद की तह तक जाने के लिए तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्य जुटा रही है। घटनास्थल के आसपास रहने वाले लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं ताकि दीवार तोड़ने की वास्तविक तारीख और समय की पुष्टि हो सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून सबके लिए बराबर है और यदि राजस्व रिकॉर्ड में पीड़ित का दावा सही पाया जाता है, तो आरोपी पूर्व पार्षद के खिलाफ गिरफ्तारी सहित कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है और राजस्व विभाग की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
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