Raipur law order issue : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर इन दिनों अपराध की लहर से थर्रा रही है। बीते 72 घंटे के भीतर राजधानी में जहां पांच हत्याएं हुईं, वहीं जेल में बंद एक कांग्रेस नेता पर जानलेवा हमला किया गया। इसके अलावा दुर्ग जेल में एक हत्या के आरोपी ने आत्महत्या कर ली। इन घटनाओं ने न सिर्फ राजधानी की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को भी कटघरे में ला खड़ा किया है।
सबसे सनसनीखेज घटना रायपुर सेंट्रल जेल में घटी, जहां 17 जुलाई को युवा कांग्रेस नेता आशीष शिंदे पर तीन विचाराधीन कैदियों—साई, महेश रात्रे और जामवंत—ने ब्लेड और कटर से हमला कर दिया। इस हमले में शिंदे को चेहरे, छाती और गले पर गंभीर चोटें आईं और उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
जेल प्रशासन इस हमले को आपसी रंजिश का नतीजा मान रहा है, लेकिन सवाल यह उठता है कि धारदार हथियार आखिर जेल के भीतर कैसे पहुंचे? यह घटना जेल में गैंगवार की स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था की भारी चूक को उजागर करती है। फिलहाल जेल प्रशासन ने आंतरिक जांच शुरू कर दी है और सुरक्षा कड़ी करने की बात कही है।
राजधानी में बीते तीन दिनों में हुई हत्याओं में से तीन मामलों में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन मामलों में हत्या के समय आरोपी नशे की हालत में थे। यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि नशे की लत अपराध को बढ़ावा दे रही है और इस दिशा में भी ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
रायपुर में हाल के वर्षों में हत्या के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है।
ये आंकड़े बताते हैं कि राजधानी में अपराधियों का मनोबल बढ़ा हुआ है और पुलिस की व्यवस्था सवालों के घेरे में है।
जेल के भीतर और बाहर बढ़ते अपराधों को लेकर प्रदेश की सियासत भी गर्मा गई है। कांग्रेस ने विष्णुदेव साय सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। कांग्रेस मीडिया सेल के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा—“बीजेपी की सरकार में 72 घंटे में राजधानी में 5 हत्याएं होती हैं और राज्यभर में 28 हत्या के मामले सामने आते हैं। इस सरकार में तो जेल तक सुरक्षित नहीं है।”
इस पर बीजेपी ने भी पलटवार किया है। बीजेपी प्रवक्ता गौरीशंकर ने कहा—“भूपेश सरकार के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ लगातार पांच साल एनसीआरबी डेटा में अपराध के मामले में टॉप-5 में था, अब स्थिति में सुधार आया है। हालांकि हाल की घटनाएं चिंता का विषय हैं, लेकिन सरकार कार्रवाई कर रही है। कुछ मामलों में तो एसपी और कलेक्टर तक के तबादले किए गए हैं।”
बढ़ते अपराधों और जेल में हुई घटनाओं ने प्रशासन और गृह विभाग को सतर्क कर दिया है। सवाल यह है कि क्या अब कोई ठोस और सख्त कदम उठाए जाएंगे या यह भी बाकी मामलों की तरह सिर्फ जांच और बयानबाजी तक सीमित रह जाएगा? फिलहाल प्रदेश की जनता जवाब मांग रही है कि कब राजधानी और राज्य में सुरक्षित माहौल बहाल होगा।
रायपुर और दुर्ग की हालिया घटनाएं राज्य सरकार के लिए कानून-व्यवस्था की कसौटी हैं। न सिर्फ अपराधों पर काबू पाने की जरूरत है, बल्कि जेल जैसी संवेदनशील जगहों की सुरक्षा भी पुख्ता की जानी चाहिए। विपक्ष और सत्ता पक्ष के आरोप-प्रत्यारोप के बीच असली मुद्दा यह है कि क्या आम नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस कर पा रहा है या नहीं?
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