Raipur Nakti Protest: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नकटी गांव से विस्थापित हुए लोगों का आक्रोश अब सीधे सरकार के नीति-निर्धारकों तक पहुंच गया है। शुक्रवार से ही बड़ी संख्या में विस्थापित परिवार आवास और वित्त मंत्री ओपी चौधरी के शंकर नगर स्थित शासकीय बंगले के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। प्रदर्शन में बड़ी तादाद में पुरुष, महिलाएं और छोटे बच्चे शामिल हैं, जो अपनी मांगों को लेकर लगातार सरकार विरोधी नारेबाजी कर रहे हैं। इस प्रदर्शन ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि एक वरिष्ठ मंत्री के सरकारी निवास पर इस तरह का सीधा जमावड़ा सरकार की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहा है।

पुनर्वास और न्याय की मांग पर अड़े ग्रामीण
प्रदर्शनकारी ग्रामीणों का मुख्य तर्क यह है कि उनके घरों को प्रशासन द्वारा तोड़ा तो गया, लेकिन उनके पुनर्वास के लिए कोई भी ठोस या संतोषजनक व्यवस्था अब तक नहीं की गई है। विस्थापितों का स्पष्ट कहना है कि वे किसी भी कीमत पर वापस नकटी गांव में ही बसाए जाने की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि सरकार ने उन्हें बेघर तो कर दिया, लेकिन उन्हें मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया है। ग्रामीणों ने घोषणा की है कि जब तक सरकार की ओर से उनकी पुनर्वास की मांग पर कोई लिखित और ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक वे इस स्थान से हटने वाले नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों का यह दृढ़ संकल्प उनके गहरे असंतोष और प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।

सुरक्षा घेरे में मंत्री का बंगला और पुलिस की तैनाती
विस्थापितों के इस उग्र प्रदर्शन को देखते हुए स्थिति काफी संवेदनशील हो गई है। किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मंत्री के सरकारी बंगले के बाहर भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। पुलिस प्रशासन लगातार हालात पर बारीकी से नजर रख रहा है। पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है ताकि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन न हो। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति का सम्मान करते हैं, लेकिन किसी भी स्थिति में कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी। फिलहाल, प्रदर्शन स्थल पर तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।
बढ़ता राजनीतिक दबाव और भविष्य की चुनौतियां
नकटी विस्थापन का यह मुद्दा अब केवल स्थानीय समस्या नहीं रहा, बल्कि यह राज्य की राजनीति का एक अहम केंद्र बन चुका है। विपक्षी दल पहले से ही इस मुद्दे को लेकर सरकार को आड़े हाथों ले रहे हैं, और अब विस्थापितों का सीधे मंत्री के आवास पर प्रदर्शन सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती साबित हो रहा है। प्रशासन पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है कि वह इस मामले में कोई बीच का रास्ता निकाले। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मंत्री ओपी चौधरी प्रदर्शनकारियों से वार्ता के लिए पहल करेंगे या यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप धारण करेगा। आने वाले कुछ घंटे या दिन यह तय करेंगे कि सरकार इस विस्थापन विवाद को कैसे सुलझाती है और विस्थापितों की नाराजगी को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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